• 21/07/2025

Big Breaking: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, मानसून सत्र के बीच क्यों छोड़ा पद? जानें वजह

Big Breaking: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, मानसून सत्र के बीच क्यों छोड़ा पद? जानें वजह
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भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के तहत राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति और देश की सेवा करने का अवसर देने के लिए आभार व्यक्त किया। धनखड़ ने 6 अगस्त 2022 को देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी और अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने से पहले यह कदम उठाया। उन्होंने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्यगत कारणों का हवाला दिया है।

स्वास्थ्य कारणों का हवाला

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अपने त्यागपत्र में लिखा, “स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए मैंने संवैधानिक प्रावधानों के तहत उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। मुझे देश की सेवा का अवसर देने के लिए मैं महामहिम राष्ट्रपति का हृदय से आभारी हूं।” हालांकि, उनके स्वास्थ्य से जुड़ी विशिष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

कैसा रहा करियर?

जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक जाट परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई, जिसके बाद वे चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में पढ़े। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में चयन होने के बावजूद उन्होंने सेना में जाने के बजाय पढ़ाई को प्राथमिकता दी। राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की और जयपुर में लंबे समय तक वकालत की।

धनखड़ का राजनीतिक सफर 1989 में शुरू हुआ, जब वे झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गए। वे वी.पी. सिंह और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई विवादास्पद मुद्दों पर मुखर रुख अपनाया। 2022 में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में उनकी नियुक्ति हुई।

उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल

उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ का कार्यकाल तीन साल से कम रहा। इस दौरान उन्होंने राज्यसभा के सभापति के रूप में कई महत्वपूर्ण सत्रों की अध्यक्षता की। उनके कार्यकाल में संसद में विपक्ष के साथ तीखी बहसें और कुछ विवाद भी चर्चा में रहे। धनखड़ ने हमेशा संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया।

आगे क्या?

उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद अब नया उपराष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर 6 महीने के भीतर नया उपराष्ट्रपति चुना जाना अनिवार्य है। धनखड़ के इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस रिक्त पद को भरने के लिए किसे चुनती है।

जगदीप धनखड़ ने अपने बयान में देशवासियों से अपील की कि वे भारत के संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र को मजबूत करने में योगदान दें। उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ यह खबर देश के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई है।

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