• 12/09/2025

कौन हैं राधाकृष्णन? बने देश के 15वें उपराष्ट्रपति.. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, जानें उनके बारे में

कौन हैं राधाकृष्णन? बने देश के 15वें उपराष्ट्रपति.. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, जानें उनके बारे में
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सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 67 वर्षीय राधाकृष्णन को पद की शपथ दिलाई। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार राधाकृष्णन ने 9 सितंबर को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराकर यह पद हासिल किया था। यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से अचानक इस्तीफे के बाद हुआ, जिनका कार्यकाल दो वर्ष शेष था।

महाराष्ट्र राज्यपाल पद से इस्तीफा

उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति भवन के बयान के अनुसार, उनके इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अब देवव्रत दोनों राज्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे। राधाकृष्णन पिछले साल जुलाई में महाराष्ट्र के राज्यपाल बने थे और इससे पहले फरवरी 2023 में झारखंड के राज्यपाल नियुक्त हुए थे, जहां उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला।

असाधारण रही राजनीतिक यात्रा

राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति तक का सफर असाधारण रहा है। तमिलनाडु के ओबीसी कोंगु वेल्लार (गाउंडर) समुदाय से आने वाले राधाकृष्णन ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक के रूप में की। 1974 में वह भारतीय जनसंघ की तमिलनाडु कार्यकारिणी के सदस्य बने और 1996 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्य सचिव नियुक्त हुए। 1998 और 1999 में वह कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए, हालांकि 2004, 2014 और 2019 में उन्हें इस सीट से हार का सामना करना पड़ा। सांसद रहते हुए उन्होंने कपड़ा मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता की और स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष संसदीय समिति के सदस्य रहे।

संगठन और प्रशासन में मजबूत पकड़

राधाकृष्णन ने 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने 93 दिनों में 19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा की, जिसका उद्देश्य नदियों को जोड़ना, आतंकवाद का उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करना, अस्पृश्यता निवारण और मादक पदार्थों के खतरों से निपटना था। 2020 से 2022 तक वह केरल भाजपा के प्रभारी रहे। 2016 में कोच्चि के कॉयर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में नारियल रेशे के निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई।

संयुक्त राष्ट्र में संबोधन और अन्य उपलब्धियां

2004 में राधाकृष्णन ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया और ताइवान जाने वाले पहले भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने। उनकी विनम्र और सुलभ छवि के कारण समर्थक उन्हें “तमिलनाडु का मोदी” कहते हैं। उनकी शादी सुमति से हुई है और उनके एक बेटा व एक बेटी हैं।

राधाकृष्णन ने दक्षिण भारत में भाजपा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव उन्हें एक मजबूत नेता बनाते हैं। उपराष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल देश के लिए महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।

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