• 07/10/2025

शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, 4 दिन बाद फिर जाना होगा जेल

शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, 4 दिन बाद फिर जाना होगा जेल
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छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी और कारोबारी अनवर ढेबर को 4 दिन की अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। यह जमानत उनकी मां की गंभीर बीमारी को ध्यान में रखते हुए दी गई है, जिससे ढेबर को पुलिस अभिरक्षा में ही अपनी मां के साथ 4 दिनों तक रहने की अनुमति मिली है। जमानत अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें जेल लौटना होगा।

अदालत में सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनकी मां अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक है। ढेबर ने अपील की थी कि वे अपनी मां से मिलना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने सहानुभूति जताते हुए कहा, “परिवार के ऐसे मुश्किल समय में इंसान को अपने अपनों के साथ रहने का अवसर मिलना चाहिए।” हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल मां की तबीयत के आधार पर दी जा रही है और मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

यह फैसला छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले के संदर्भ में आया है, जहां अनवर ढेबर को सिंडिकेट का केंद्रीय चेहरा माना जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में यह घोटाला 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का आंका गया है।

शराब घोटाला क्या है? पूरी जांच का खुलासा

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला पूर्व भूपेश बघेल सरकार (2018-2023) के कार्यकाल से जुड़ा है, जिसमें आबकारी विभाग के अधिकारियों, आईएएस अफसरों और कारोबारियों के एक सिंडिकेट ने सरकारी शराब नीति का दुरुपयोग कर अरबों रुपये का घोटाला किया। ईडी और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच में यह सामने आया कि तत्कालीन आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नेतृत्व में सिंडिकेट ने कमीशन, नकली शराब की बिक्री और सप्लाई जोन मैनिपुलेशन से सरकारी खजाने को चूना लगाया।

घोटाले की रकम शुरू में 2,100 करोड़ अनुमानित थी, जो अब 3,200 करोड़ तक पहुंच चुकी है। अनवर ढेबर को ही 90 करोड़ से अधिक की रकम मिली, जिसे उन्होंने रिश्तेदारों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के नाम से कई कंपनियों में निवेश कर लॉन्ड्रिंग किया। ईओडब्ल्यू की चार्जशीट के अनुसार:

कमीशन सिस्टम: शराब डिस्टलरी से कमीशन और ‘बी पार्ट’ (अवैध) शराब बिक्री से मिलने वाले पैसे का 15% अनवर ढेबर को जाता था।

सहयोगी: ढेबर के करीबी विकास अग्रवाल (सुब्बू) और अन्य शराब दुकानों से पैसा वसूलते थे।

सिंडिकेट कैसे बना? फरवरी 2019 की ऐतिहासिक मीटिंग

सिंडिकेट की नींव फरवरी 2019 में पड़ी, जब अनवर ढेबर ने रायपुर के जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश की प्रमुख डिस्टलरी मालिकों को बुलाया। इस बैठक में शामिल हुए:

डिस्टलरी प्रतिनिधि: छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया; भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया; वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल (चुन्नू), हीरालाल जायसवाल और संजय फतेहपुरिया।

सरकारी अधिकारी: एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह।

मीटिंग में ढेबर ने तय किया कि डिस्टलरी से शराब सप्लाई पर प्रति पेटी कमीशन लिया जाएगा, बदले में रेट बढ़ाने का आश्वासन दिया गया। कारोबार को A, B और C पार्ट में बांटा गया:

पार्ट
विवरण
कमीशन/लाभ
खास तथ्य
A
डिस्टलरी संचालकों से कमीशन
2019 में प्रति पेटी 75 रुपये, बाद में 100 रुपये
टेंडर में शराब रेट बढ़ाए गए; ओवर-बिलिंग की छूट दी गई।
B
नकली होलोग्राम वाली शराब सरकारी दुकानों से बिकवाना
प्रति पेटी 2,880 से 3,840 रुपये (एमआरपी); डिस्टलरी को 560-600 रुपये
विधु गुप्ता से नकली होलोग्राम; अरविंद-अमित सिंह से खाली बोतलें और ट्रांसपोर्ट। 15 जिलों में 40 लाख पेटी बिकी, बिना शुल्क। एपी त्रिपाठी ने दुकान कर्मियों/अधिकारियों को शामिल किया।
C
डिस्टलरी सप्लाई एरिया मैनिपुलेशन
8 जोन में बंटवारा; कमीशन आधार पर जोन बदलाव
एपी त्रिपाठी ने विश्लेषण रिपोर्ट दी। 3 वित्तीय वर्षों में 52 करोड़ पार्ट C से वसूले गए।

इसके अलावा, विदेशी शराब पर भी कमीशन का विश्लेषण जारी है।

गिरफ्तारियां: 13 लोग अब तक हिरासत में

ईओडब्ल्यू ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रमुख नाम:

  • पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा।
  • अरुणपति त्रिपाठी (एमडी, CSMCL)।
  • अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा, सुनील दत्त।
  • अन्य: अनिल टुटेजा (आईएएस),आदि।

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