• 06/03/2026

स्व सहायता समूह से बदली सुनीता दीदी की तकदीर, खेती-किराना और महुआ व्यापार से बनीं आत्मनिर्भर

स्व सहायता समूह से बदली सुनीता दीदी की तकदीर, खेती-किराना और महुआ व्यापार से बनीं आत्मनिर्भर
Spread the love

बीजापुर। बीजापुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर नियद नेल्लानार क्षेत्र के ग्राम चेरपाल के छोटे से गांव में रहने वाली सुनीता दीदी की कहानी आज आत्मनिर्भरता और मेहनत की मिसाल बन गई है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में जीवन बिताने वाली सुनीता दीदी आज स्व सहायता समूह की मदद से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हुए अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

पहले उनके परिवार की आय केवल खेती और एक छोटी किराना दुकान पर निर्भर थी। कृषि मौसम पर आधारित होने के कारण आय स्थिर नहीं रहती थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर की आवश्यकताओं को पूरा करना भी कठिन हो जाता था। ऐसे समय में सुनीता दीदी ने गांव के स्व सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह की बैठकों में उन्हें बचत ऋण और स्वरोजगार के बारे में जानकारी मिली।

समूह के माध्यम से नियमित बचत के साथ उन्हें आरएफ से 1500 रुपये, सीआईएफ से 50 हजार रुपये और बैंक लिंकेज से 30 हजार रुपये का ऋण मिला। इस सहायता से उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए कई कार्य शुरू किए।

सबसे पहले उन्होंने खेती को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। उन्नत बीज, जैविक खाद और आधुनिक खेती तकनीकों का उपयोग कर उन्होंने उत्पादन बढ़ाया, जिससे फसल और सब्जियों से उन्हें सालाना लगभग 52 हजार से 55 हजार रुपये की आय होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपने घर के पास स्थित छोटी किराना दुकान को बड़े स्तर पर संचालित करना शुरू किया। गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध कराने से उनकी दुकान अच्छी चलने लगी और इससे उन्हें सालाना करीब 45 हजार से 50 हजार रुपये की नियमित आय मिलने लगी। इसी के साथ सुनीता दीदी ने गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए महुआ, टोरा सहित अन्य वनोपज का क्रय-विक्रय भी शुरू किया। वे ग्रामीणों से महुआ और टोरा खरीदकर उसे साफ-सफाई के साथ सुरक्षित संग्रहित कर बाजार में अच्छे दामों पर बेचने लगीं, जिससे उन्हें सालाना लगभग 15 हजार से 20 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने लगा।

तीनों कार्यों से उनकी आय लगातार बढ़ती गई। सही योजना, मेहनत और समूह के सहयोग से सुनीता दीदी की वार्षिक आय अब 1 लाख 15 हजार से बढ़कर 1 लाख 20 हजार रुपये से अधिक हो गई है। आज सुनीता दीदी न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुकी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग, निरंतर मेहनत और स्व सहायता समूह का सहयोग किसी भी महिला को आत्मनिर्भर बना सकता है।

Related post

छत्तीसगढ़ में रेलवे विस्तार को मिली रफ्तार, वार्षिक बजट आवंटन बढ़कर 7,470 करोड़

छत्तीसगढ़ में रेलवे विस्तार को मिली रफ्तार, वार्षिक बजट…

Spread the love00 प्री-2014 स्तर की तुलना में औसत वार्षिक रेल बजट आवंटन में 24 गुना वृद्धि, 36 परियोजनाओं पर चल…
एम्स रायपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

एम्स रायपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि…

Spread the love00 2 सितंबर को होगा दीक्षांत समारोह, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में होंगी शामिल…
आज विज्ञान इतना विकास कर लिया है कि एआई के जरिए जटिल से जटिल ऑपरेशन हो रहा आसानी से – डा. रमन

आज विज्ञान इतना विकास कर लिया है कि एआई…

Spread the love00 रीढ़ की हड्डी जोडऩे में लग जाते है 8 से 10 लाख,  नारायणा में 50 मरीजों का हो…