• 20/04/2026

भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्क्रैप की बिक्री से 6813.86 करोड़ की कमाई की

भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्क्रैप की बिक्री से 6813.86 करोड़ की कमाई की

00 स्क्रैप से होने वाली लगातार आय और गैर-किराया राजस्व में वृद्धि से रेलवे को यात्री किराए में वृद्धि किए बिना स्टेशन अनुभव बेहतर बनाने में मदद मिली
रायपुर/बिलासपुर। भारतीय रेलवे, स्क्रैप से होने वाली निरंतर आय और गैर-किराया राजस्व स्रोतों में लगातार वृद्धि की मदद से यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाते हुए अपनी वित्तीय स्थिरता को मजबूत कर रहा है और यह सभी सुविधाएं बिना यात्री टिकट किराए बढ़ाए मुमकिन हो पा रही हैं। निष्क्रिय संपत्तियों से मूल्य प्राप्त करके और किराए के अलावा अन्य नए राजस्व स्रोतों का विस्तार करके, रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि स्टेशन पर सुविधाओं, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और यात्री सुविधाओं में सुधार वित्तीय रूप से टिकाऊ तरीके से हासिल किए जाएं। यह संतुलित दृष्टिकोण कुशल परिसंपत्ति प्रबंधन, ग्राहक-केंद्रित निवेश और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं पर रणनीतिक फोकस को दर्शाता है, जो अधिक आरामदायक, आधुनिक और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए रेलवे की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

भारतीय रेलवे ने स्क्रैप निपटान में एक अहम उपलब्धि हासिल की है और वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। 6000 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले, रेलवे ने 6813.86 करोड़ रुपए की स्क्रैप बिक्री दर्ज की, जो निर्धारित बेंचमार्क से कहीं अधिक है और उल्लेखनीय दक्षता दर्शाती है। यह उपलब्धि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के मजबूत प्रदर्शन पर आधारित है, जिसमें भारतीय रेलवे ने 5400 करोड़ रुपए के लक्ष्य को पार करते हुए 6641.78 करोड़ रुपए की स्क्रैप बिक्री की थी।

निरंतर स्क्रैप मुद्रीकरण भारतीय रेलवे के कुशल परिसंपत्ति प्रबंधन और पारदर्शी निपटान तंत्र के प्रति केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस्तेमाल में ना आने वाली सामग्रियों को व्यवस्थित रूप से हटाकर, संगठन न केवल निष्क्रिय परिसंपत्तियों से मूल्य प्राप्त कर रहा है, बल्कि डिपो, यार्ड और कार्यशालाओं में महत्वपूर्ण स्थान भी खाली कर रहा है। यह पहल पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर और अपशिष्ट संचय को कम करके पर्यावरणीय स्थिरता में भी अहम योगदान देती है।

रेलवे को सुदृढ़ और यात्री अनुभव को बेहतर बनाता गैर-किराया राजस्व
गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने का एक ज़रुरी स्तंभ बनकर उभरा है, जिससे पूरे नेटवर्क में यात्रियों को सीधा लाभ मिलता है। स्टेशन पुनर्निर्माण, विज्ञापन, रेलवे संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग और अन्य नवोन्मेषी पहलों जैसे माध्यमों से राजस्व उत्पन्न करके, एनएफआर यात्री किराए और माल ढुलाई से होने वाली आय पर अत्यधिक निर्भरता को कम करता है। यह अतिरिक्त आय भारतीय रेलवे को आधुनिक बुनियादी ढांचे में पुनर्निवेश करने, स्टेशन सुविधाओं को उन्नत करने, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने, डिजिटल सेवाओं में सुधार करने और बेहतर ट्रेनें और सुरक्षा प्रणालियाँ शुरू करने में सक्षम बनाती है। कुल मिलाकर इससे यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुविधाजनक और विश्वसनीय यात्रा अनुभव मिलता है।वित्तीय वर्ष 2021-22 में लगभग 290 करोड़ रुपए से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 777.76 करोड़ रुपए तक एनएफआर आय में लगातार वृद्धि एक मजबूत विकास पथ को दर्शाती है, जो पांच वर्षों में लगभग 168′ की कुल वृद्धि दर्ज करती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित एनएफआर लक्ष्य 720.85 करोड़ रुपए था, जिसे वास्तविक आय 777.76 करोड़ रुपए तक पहुँचकर पहले ही पार कर लिया गया है, जो लगभग 107.9′ की उपलब्धि है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एनएफआर आय 686.86 करोड़ रुपए थी। यह प्रक्रिया भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में रणनीतिक मुद्रीकरण पहलों के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है।
प्रीमियम ब्रांड आउटलेट
एनएफआर को बढ़ावा देने के लिए कंपनी के स्वामित्व वाले सिंगल ब्रांड प्रीमियम आउटलेट स्थापित करने के लिए जोनल रेलवे को दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे ने इस नीति के तहत कुछ नवोन्मेषी ब्रांडेड आउटलेट खोले हैं और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इसी तर्ज पर अन्य ब्रांडेड स्टोर भी खोले जाएंगे। सभी भारतीय रेलवे में एनएफआर के जरिए 22 प्रीमियम ब्रांड आवंटित किए गए हैं।