• 01/06/2026

मुख्यमंत्री ने किया बड़े कनेरा में मिलीं दुर्लभ पांडुलिपियां का अवलोकन

मुख्यमंत्री ने किया बड़े कनेरा में मिलीं दुर्लभ पांडुलिपियां का अवलोकन
Spread the love

रायपुर । छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़े अमूल्य विरासत संरक्षण के प्रयासों को नई प्रेरणा देते हुए मुख्यमंत्री साय ने सोमवार को सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा का दौरा किया। यहां उन्होंने ज्ञान भारतम् अभियान के तहत संरक्षित लगभग 150 वर्ष पुरानी उड़िया भाषा में लिखित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण में जुटे परिवारों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम निवासी रामूराम यादव से मुलाकात कर उनके पास सुरक्षित रखी गई आठ प्राचीन पांडुलिपियों को देखा तथा उनके इतिहास, उपयोग और संरक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें केवल पुस्तकीय विरासत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की जीवंत पहचान हैं। इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने पीढ़ियों से इन पांडुलिपियों को सहेजकर रखने वाले परिवारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज की भागीदारी के बिना सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संभव नहीं है। जिन परिवारों ने दशकों तक इन धरोहरों को सुरक्षित रखा है, वे वास्तव में हमारी ज्ञान-संपदा के संरक्षक हैं।

इस अवसर पर बड़े कनेरा के हरदू कश्यप, परमेश्वर मानिकपुरी, अमरावती के त्रिलोचन मानिकपुरी, पुरसोती राम मौर्य तथा कोपरा ग्राम के चमरू नाग ने भी मुख्यमंत्री से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये पांडुलिपियां उनके दादा-परदादाओं के समय से परिवारों में संरक्षित हैं और आज भी अत्यंत सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखी जाती हैं।

सरक्षकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इन पांडुलिपियों में पंजीयार, पंजी, पुराण, पंचांग तथा चक्रकूट पंचांग जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं, जिनका उपयोग परंपरागत ज्ञान, धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक व्यवस्थाओं तथा ज्योतिषीय गणनाओं में किया जाता रहा है। इन ग्रंथों में स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक विधानों और समय गणना की विशिष्ट प्रणालियों का भी उल्लेख मिलता है।

मुख्यमंत्री साय ने पांडुलिपियों के अध्ययन की प्रक्रिया, उन्हें पढ़ने-समझने की पारंपरिक पद्धतियों तथा वर्तमान समय में उनके संरक्षण की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में प्राचीन ज्ञान-संपदा के संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा से जुड़ी रह सकें।

 

Related post

Aaj ka Panchang: चतुर्दशी के बाद शुरू होगी अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Aaj ka Panchang: चतुर्दशी के बाद शुरू होगी अमावस्या,…

Spread the loveआज भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी है और इसके बाद अमावस्या शुरू होगी. इस दिन शिव पूजा, पितरों के स्मरण और…
Aaj Ka Rashifal 10 September 2026 : मेष से मीन तक जानें कैसा रहेगा आज का दिन, नौकरी-धन और रिश्तों में क्या होगा बदलाव

Aaj Ka Rashifal 10 September 2026 : मेष से…

Spread the loveAaj Ka Rashifal 10 September 2026 : आज का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आ…
ब्रेकिंग : इस विभाग में बड़े पैमाने पर हुए तबादले, कई तहसीलदार हुए इधर से उधर, देखें पूरी लिस्ट…

ब्रेकिंग : इस विभाग में बड़े पैमाने पर हुए…

Spread the loveरायपुर। राज्य सरकार ने राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया है। 57 तहसीलदार और नायब तहसीलदाराें को…