• 16/06/2026

CG DMF Scam Case : रायपुर, दुर्ग समेत छत्तीसगढ़ में 5 अलग – अलग जिलों में ED की रेड

CG DMF Scam Case : रायपुर, दुर्ग समेत छत्तीसगढ़ में 5 अलग – अलग जिलों में ED की रेड
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रायपुर।  छत्तीसगढ़ के 5 अलग-अलग जिलों में आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेड मारी है। DMF घोटाले से जुड़े कारोबारियों और ठेकेदारों के घर छापेमारी की गई है। इनमें रायपुर, दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद सहित कई ठिकाने शामिल है।

रायपुर के वल्लभ नगर में कारोबारी शाश्वत लुणावत, सरगुजा में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के फर्म मानसून एग्रो और धमतरी जिले में ठेकेदार दीपेश गांधी के आवास पर दबिश दी गई है। ED की टीम यहां डॉक्यूमेंट्स और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।

कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता के घर छापा

जानकारी के मुताबिक, राकेश गुप्ता कृषि विभाग के बड़े सप्लायर हैं। वे कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। मंगलवार (16 जून) सुबह ईडी की टीम सरगुजा पहुंची और उनके फर्म मानसून एग्रो में दबिश दी। जहां फर्म के डॉक्यूमेंट, डिजिटल और सप्लाई के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में राकेश गुप्ता के फर्म से की गई सप्लाई की जांच की जा रही है।

धमतरी में ठेकेदार के परिवार वालों का मोबाइल जब्त

ईडी की टीम सुरक्षा बलों के साथ 2 गाड़ियों में धमतरी पहुंची और कोतवाली थाना क्षेत्र के आमापारा वार्ड स्थित दीपेश गांधी के निवास पर जांच शुरू की। मकान के अंदर 6 अधिकारी दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच में जुटे हुए हैं।

बताया जा रहा है कि जांच के दौरान टीम ने घर में मौजूद परिवार वालों का मोबाइल कब्जे में लिया है। साथ ही पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। बता दें कि दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार है। वह अलग-अलग सरकारी और निजी परियोजनाओं में बड़े ठेकेदारों के साथ काम करता है।

क्या है DMF घोटाला

प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं है। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया।

ED के तथ्यों के मुताबिक टेंडर करने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नाम के लोगों के साथ मिलकर पैसे कमाए गए।

25 से 40 प्रतिशत का कमीशन

ED की जांच से पता चला कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को भारी मात्रा में कमीशन का भुगतान किया है, जो कि कांट्रैक्ट का 25% से 40% तक था। रिश्वत के लिए दी गई रकम की एंट्री विक्रेताओं ने आवासीय (अकोमोडेशन) के रूप में की थी।

मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ED

मनी लॉन्ड्रिंग की बात सामने आने के बाद ED जांच कर रही है। DMF वित्त पोषित एक ट्रस्ट है, जिसे छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में खनन से संबंधित परियोजनाओं और गतिविधियों से प्रभावित लोगों के लाभ के लिए काम करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

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