• 01/07/2026

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड
Spread the love

वन मंत्री कश्यप के मार्गदर्शन में संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का मिला संकेत’
00 अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 के कैमरा ट्रैप में पहली बार रिकॉर्ड हुआ चार ढोलों का संगठित झुंड
रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। अखिल भारतीय बाघ आकलन (एआईटीई) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और बेहतर वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।
’दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी से मजबूत हुआ संरक्षण का भरोसा’
ढोल (भारतीय जंगली कुत्ता) देश के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और प्राकृतिक आवास पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलित और स्वस्थ होने का संकेत मिलता है।
’संरक्षण के लिए उठाए गए प्रभावी कदम’
वन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देश पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इनमें वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर प्राकृतिक स्वरूप में विकसित करना, वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत करना तथा कैमरा ट्रैप और आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी करना शामिल है। इन प्रयासों में स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।
’956 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से हुई मुक्त’
वन विभाग ने रिजर्व क्षेत्र की लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इससे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास और आवागमन के मार्ग फिर से उपलब्ध हुए। साथ ही 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और अवैध शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत किया गया।
’ढोल क्यों हैं जंगल के लिए महत्वपूर्ण’
ढोल झुंड में रहने वाले सामाजिक और अनुशासित वन्यजीव हैं। ये चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखते हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि इनकी मौजूदगी किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।
’जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि’
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने बताया कि ढोल के संगठित झुंड का रिकॉर्ड होना यह प्रमाणित करता है कि रिजर्व की खाद्य-श्रृंखला मजबूत हुई है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण विकसित हुआ है। यह उपलब्धि वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।
’वन्यजीव संरक्षण का उभरता मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़’
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों से यह रिजर्व मध्य भारत में वन्यजीवों के सुरक्षित और समृद्ध आवास के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

Related post

खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराएगी हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक…

Spread the loveउत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की होगी व्यवस्था, प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने में निभाएंगे…
रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व…

Spread the loveमुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन रामगढ़ के विकास के लिए 1…
मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगम : साय

मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगम…

Spread the loveफॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका” में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद रायपुर।…