- 20/08/2026
रक्षाबंधन पर छत्तीसगढ़ के बाजारों में बढ़ी रौनक, 500 से 600 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान – पारवानी

00 देशभर में राखी पर्व में स्वदेशी एवं स्थानीय राखियों की बढ़ी मांग – CAIT
रायपुर। देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT ) के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी एवं शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि रक्षाबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ के बाजारों में अच्छी खासी हलचल देखने को मिल रही है। राखी के साथ मिठाई, कपड़े, उपहार, कॉस्मेटिक्स, पूजा सामग्री एवं अन्य त्योहारी वस्तुओं की बिक्री में भी तेजी आने की उम्मीद है।
अमर पारवानी ने कहा कि देशभर में इस वर्ष राखी का कारोबार लगभग ₹25 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं छत्तीसगढ़ में राखी एवं इससे जुड़े त्योहारी कारोबार का बाजार लगभग ₹500 से ₹600 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। रक्षाबंधन के आसपास होने वाली मिठाई, उपहार, वस्त्र, पैकेजिंग एवं अन्य खरीदारी को मिलाकर प्रदेश के त्योहारी बाजार में इससे कहीं अधिक कारोबार होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के पहले से ही रायपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों और कस्बों के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। राखी बाजार के साथ कपड़ा, मिठाई, गिफ्ट, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी त्योहारी मांग बढ़ रही है।
स्वदेशी और स्थानीय राखियों की बढ़ती मांग
पारवानी ने कहा कि इस वर्ष बाजार में भारतीय निर्मित एवं स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की मांग में विशेष वृद्धि दिखाई दे रही है। पारंपरिक राखियों के साथ खादी, जूट, बांस, बीज, सिल्क, मोती और हस्तनिर्मित राखियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में भी महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार बीज राखी, हस्तनिर्मित राखी तथा स्थानीय सामग्री से बनी राखियों को अच्छा बाजार मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिला समूहों द्वारा तैयार बीज राखियों की मांग इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बाजार में राखियों की कीमत और डिजाइन के अनुसार बड़ी विविधता उपलब्ध है। सामान्य राखियों से लेकर प्रीमियम एवं हस्तनिर्मित राखियों तक हर वर्ग के ग्राहकों के लिए विकल्प मौजूद हैं। इससे छोटे दुकानदारों, कारीगरों और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को भी कारोबार का अवसर मिल रहा है।
राखी के साथ जुड़े बाजारों में भी बढ़ेगा कारोबार
पारवानी ने कहा कि रक्षाबंधन का बाजार केवल राखी तक सीमित नहीं है। बहनों के लिए कपड़े एवं श्रृंगार सामग्री, भाइयों के लिए गिफ्ट आइटम, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट, घड़ियां, मोबाइल एक्सेसरीज, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और पैकेजिंग जैसे अनेक व्यापारिक क्षेत्रों में त्योहारी मांग बढ़ती है। इसलिए रक्षाबंधन छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े रिटेल कारोबारियों तक के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर लेकर आता है। आने वाले दिनों में बाजार में ग्राहकों की आवाजाही और बिक्री दोनों में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
स्थानीय व्यापार और कारीगरों को मिलेगा लाभ
पारवानी ने कहा कि स्वदेशी और स्थानीय राखियों की बढ़ती मांग का सीधा लाभ छोटे निर्माताओं, महिला उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों, हस्तशिल्प कारीगरों और स्थानीय व्यापारियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान ग्राहक यदि स्थानीय बाजारों से खरीदारी करते हैं तो इसका लाभ सीधे स्थानीय व्यापार और रोजगार से जुड़े लोगों तक पहुंचता है। रक्षाबंधन के बाद आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारियों को आने वाले महीनों में भी बाजार में अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
“रक्षाबंधन इस वर्ष छत्तीसगढ़ के व्यापारिक बाजार के लिए एक मजबूत कारोबारी अवसर लेकर आया है। राखी से लेकर मिठाई, कपड़े, उपहार और अन्य त्योहारी वस्तुओं तक बाजार में मांग बढ़ रही है। प्रदेश में राखी एवं इससे जुड़े कारोबार के ₹500 से ₹600 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारीगरों को भी अच्छा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।” – अमर पारवानी


