• 30/08/2026

जहां कभी बंदूक थी, वहां बंधा रिश्तों का धागा…बस्तर में राखी ने बदली ‘दुश्मनी’ की परिभाषा 25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी

जहां कभी बंदूक थी, वहां बंधा रिश्तों का धागा…बस्तर में राखी ने बदली ‘दुश्मनी’ की परिभाषा 25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रक्षाबंधन के अवसर पर एक भावुक और बदलाव का संदेश देने वाली तस्वीर सामने आई। भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन में सक्रिय रहीं मीना के लिए यह क्षण विशेष रहा। कभी जिस वर्दी से टकराव और अविश्वास जुड़ा था, उसी वर्दी पहने जवान की कलाई पर उन्होंने रक्षा-सूत्र बांधकर नए रिश्ते और विश्वास की शुरुआत का संदेश दिया।

हथियार की जगह हाथ में थी राखी

रक्षाबंधन के आयोजन में मुख्यधारा में लौट चुकीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने सुरक्षा बल के जवानों को राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार करते हुए शगुन दिया और मिठाई खिलाई। यह दृश्य बस्तर में वर्षों से चले आ रहे हिंसक संघर्ष के बीच संवाद और सामाजिक विश्वास की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा गया।

महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथ

कार्यक्रम में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान पूर्व नक्सली महिलाएं और सुरक्षा बल के जवान संघर्ष के दो पक्षों के बजाय भाई-बहन के रिश्ते में नजर आए। आयोजन का उद्देश्य मुख्यधारा में लौटे लोगों के प्रति सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने और सुरक्षा बलों तथा स्थानीय समाज के बीच विश्वास को मजबूत करना रहा।

एसपी ने बताया अनूठी पहल

कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समस्या के समाधान की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों का यह रक्षाबंधन प्रतीक है। रिश्तों का यह धागा सामान्य संबंधों और विश्वास को मजबूत करने में मदद करेगा।

मीना के लिए नई शुरुआत का संदेश

करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन में रहने के बाद मुख्यधारा में लौटना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा बदलाव होता है। ऐसे में जवानों की कलाई पर राखी बांधना केवल त्योहार मनाने की रस्म नहीं, बल्कि अतीत की कड़वाहट पीछे छोड़कर सामान्य सामाजिक जीवन की ओर बढ़ने का प्रतीक भी बना।

बदलते बस्तर की मानवीय तस्वीर

बस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़ों और भय के माहौल से जुड़ी रही है। अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते लोगों के साथ विकास, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और सामाजिक विश्वास बहाली के प्रयास भी इस बदलाव की कहानी का हिस्सा बन रहे हैं। भानुप्रतापपुर में रक्षाबंधन का यह आयोजन इसी बदलती तस्वीर को सामने लाता है।

राखी का धागा भले ही छोटा हो, लेकिन इसका संदेश व्यापक है। यह बताता है कि हिंसा से बाहर निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौटने वालों के लिए समाज में स्वीकार्यता और विश्वास का रास्ता बनाया जा सकता है। बस्तर में इस रक्षाबंधन पर कलाई पर बंधी राखी ने भाईचारे, संवाद और शांति की उम्मीद को मजबूत किया।

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