• 10/02/2026

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट का विस्तार, केंद्र से 3,500 करोड़ के प्रस्ताव की मांग

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट का विस्तार, केंद्र से 3,500 करोड़ के प्रस्ताव की मांग

रायपुर – केंद्र सरकार की भारत नेट योजना के तीसरे चरण (फेज-थ्री) में प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में आप्टिकल फाइबर केबल पहुंचाई जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा लोगों को मिलेगी। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को 3,500 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। इसके साथ प्रदेश में पांच हजार नए मोबाइल टावर भी लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

11,693 ग्राम पंचायतें हैं

त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत 11,693 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2024-25 की स्थिति में पहले और दूसरे चरण को मिलाकर भारत नेट परियोजना के तहत राज्य की 9,804 ग्राम पंचायतों को आप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जा चुका है। इसके रखरखाव एवं संचालन के लिए 66 करोड़ की पूल निधि के गठन का भी प्रविधान किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में वाई.फाई के माध्यम से हाट-स्पाट स्थापित कर प्रदेश भर में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रथम चरण में 1,000 ग्राम पंचायतों में वाईफाई की सुविधा के लिए पीएमवाणी परियोजना अंतर्गत 37 करोड़ का प्रविधान किया गया है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा उपयोग किए जा रहे ई. परिसंपत्ति, मोबाइल एप और वेबसाइट की साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक जांच एवं सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जाएगी।

बस्तर के माओवाद प्रभावित 735 गांवों में पहुंचाना है कनेक्टिविटी

बस्तर संभाग में कुल 3,791 एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में से 3,056 स्थानों पर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है, जबकि 735 ग्राम अब भी इससे वंचित हैं। शेष इलाकों में नेटवर्क विस्तार के लिए 481 नए मोबाइल टावरों की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिन्हें स्वीकृति मिल चुकी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक सभी स्वीकृत मोबाइल टावर स्थापित कर दिए जाएंगे। वर्तमान में टावर स्थलों का सर्वे कार्य प्रगति पर है। इन टावरों की स्थापना और संचालन का कार्य भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा किया जा सकता है।

फेज टू की कंपनी के साथ कानूनी विवाद

जानकारी के मुताबिक पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा चिप्स और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच 3,056 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था, जिसका लक्ष्य 6,000 गांवों तक ब्राडबैंड पहुंचाना था। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम न होने के कारण मई 2025 में टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध समाप्त कर दिया गया था। कंपनी ने खुदाई में आने वाली बाधाओं और प्रशासनिक दिक्कतों को इसका मुख्य कारण बताया था। यह मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। इस कानूनी विवाद और काम की धीमी गति के कारण फेज-दो का काम भी बाधित हुआ।

अधिकारियों का क्या कहना

अंकित आनंद, सचिव, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी का कहना है कि राज्य के हर गांव तक मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। भारत नेट योजना के तीसरे चरण में हम सभी ग्राम पंचायतों को कवर कर सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।