• 30/05/2024

शराब घोटाला केस: नकली होलोग्राम केस में ढेबर समेत बाकी आरोपियों को यूपी ले जाने की तैयारी

शराब घोटाला केस: नकली होलोग्राम केस में ढेबर समेत बाकी आरोपियों को यूपी ले जाने की तैयारी
Spread the love

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच जारी है। कारोबारी अनवर ढेबर, पूर्व रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी, अरविंद सिंह समेत 5 से 7 आरोपी जेल में बंद हैं। इस पूरी जांच में अब एक नया मोड़ आया है। अब इस मामले में यूपी पुलिस की एंट्री हो गई है।

नकली होलोग्राम बनाने को लेकर नोएडा में इन सभी पर एफआईआर दर्ज है। जिसको लेकर लखनऊ एसटीएफ की टीम गुरुवार को रायपुर पहुंची। बताया जा रहा है कि, लखनऊ एसटीएफ इन्हें अपने साथ लेकर जाएगी।

घोटाले का मास्टर माइंड कौन?

शराब घोटाला का मास्‍टर माइंड कौन है और यह घोटाला कैसे हुआ। इसको लेकर ईडी शिकायत पर 68 लोगों के नाम पर एफआईआर दर्ज हुई है, जिसमें उनकी क्‍या भूमिका है और शराब से कितनी कमाई हुई है। कितना हिस्‍सा किस अफसर और नेता को मिला है। इस पैसे को नेताओं और अफसरों ने कहां और कैसे निवेश किया। इन सभी प्रश्‍नों का जवाब एफआईआर में भी मौजूद हैं।

कई अधिकारी घोटाले में गिरफ्तार

ईडी की सूचना के आधार पर EOW में दर्ज एफआईआर में अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को शराब घोटाले का मास्‍टर माइंड बताया गया है। FIR में शामिल बाकी आईएएस और अन्‍य सरकारी अफसर और लोग सहयोगी की भूमिका में थे।

शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्‍सा इन्‍हीं तीनों को जाता था। टुटेजा आईएएस अफसर हैं, जब यह घोटाला हुआ तब वे वाणिज्‍य एवं उद्योग विभाग के संयुक्‍त सचिव थे। दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए त्रिपाठी आबकारी विभाग के विशेष सचिव और छत्‍तीसगढ़ मार्केटिंग कार्पोरेशन के एमडी थे। वहीं, ढेबर कारोबारी हैं।

परिवारवालों पर खर्च की रकम

एफआईआर के अनुसार अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर ने शराब घोटाला से प्राप्‍त रकम को अपने परिवार वालों के नाम पर निवेश किया। टुटेजा ने अपने बेटे यश टुटेजा के नाम पर निवेश किया। त्रिपाठी ने अपनी पत्‍नी मंजूला त्रिपाठी के नाम पर फर्म बनाया जिसका नाम रतनप्रिया मीडिया प्रइवेट लिमिटेड था।

अनवर ढेबर ने अपने बेटे और भतीजों के फर्म में पैसे का निवेश किया। FIR में छत्‍तीगसढ़ के पूर्व मुख्‍य सचिव विवेक ढांड का भी नाम है। ढांड पर टुटेजा, त्रिपाठी और ढेबर के शराब सिंडीकेट को संरक्षण देने का आरोप है। इसके लिए ढांड को सिंडीकेट की तरफ से राशि भी दी जाती थी।

कवासी लखमा को मिलते थे 50 लाख रुपये महीने

ईडी की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा 2020 में ढांड के यहां आयकर विभाग के सर्च के दौरान मिले दस्‍तावेजों से हुआ है। प्रदेश में बड़े स्‍तर पर हुए शराब घोटाला में तत्‍कालीन विभागीय मंत्री कवासी लखमा को हर महीने 50 लाख रुपये हिस्‍सा मिलता था। FIR के अनुसार लखमा के साथ ही विभागीय सचिव आईएएस निरंजन दास को भी सिंडीकेट की तरफ से 50 लाख रुपये हर महीने दिया जा रहा था।

Related post

CG – पत्नी की इस आदत ने पति को किया परेशान, फिर सामने आई दिल दहला देने वाली घटना…

CG – पत्नी की इस आदत ने पति को…

Spread the loveपेंड्रा/गौरेला। गौरेला थाना क्षेत्र के ग्राम केवची में पारिवारिक विवाद के चलते एक पति ने अपनी पत्नी की डंडे…
मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक संपन्न

मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स…

Spread the loveरायपुर, 13 अगस्त 2026- मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति…
छत्तीसगढ़ में निवेश की बड़ी छलांग, ग्रीन स्टील और माइनिंग में ₹13,800 करोड़ से ज्यादा के MoU

छत्तीसगढ़ में निवेश की बड़ी छलांग, ग्रीन स्टील और…

Spread the loveरायपुर, 13 अगस्त. छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने के संकेत हैं. राजधानी रायपुर में आयोजित पांचवें दो…