• 15/04/2025

छत्तीसगढ़ में हिंदू छात्रों को यूनिवर्सिटी में जबरन पढ़ाया नमाज, छात्रों का बड़ा आरोप, पुलिस में की शिकायत

छत्तीसगढ़ में हिंदू छात्रों को यूनिवर्सिटी में जबरन पढ़ाया नमाज, छात्रों का बड़ा आरोप, पुलिस में की शिकायत
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित एक राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) कैंप के दौरान 155 हिंदू छात्रों को जबरन नमाज पढ़ाने और मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने का गंभीर आरोप सामने आया है। छात्रों ने दावा किया है कि कैंप में उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान किया गया, और विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया गया। इस मामले ने विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को जांच के लिए मजबूर कर दिया है।

छात्रों के अनुसार, यह घटना 26 मार्च से 1 अप्रैल 2025 तक आयोजित NSS कैंप के दौरान हुई। कैंप में कुल 159 छात्र शामिल थे, जिनमें केवल चार मुस्लिम छात्र थे, बाकी सभी हिंदू समुदाय से। आरोप है कि 30 मार्च को ईद-उल-फितर के दिन सभी छात्रों को एकत्र कर नमाज पढ़ने के लिए बाध्य किया गया। छात्रों का कहना है कि NSS कोऑर्डिनेटर और प्रोग्राम ऑफिसर ने उन्हें “मुस्लिम धर्म की शिक्षा” देने की कोशिश की और इसे सामाजिक एकता का हिस्सा बताया। कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद उन्हें कथित तौर पर धमकियां मिलीं।

एक छात्र ने बताया, “हमें कहा गया कि नमाज पढ़ना सामुदायिक सेवा का हिस्सा है। जब हमने मना किया, तो हमें डराया गया कि इसका असर हमारी पढ़ाई और कैंप के सर्टिफिकेट पर पड़ सकता है। यह पूरी तरह से ब्रेनवॉश करने की कोशिश थी।” छात्रों ने इसकी लिखित शिकायत कोनी थाने में दर्ज कराई है और विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा, “हमें शिकायत मिली है, और इसकी जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” दूसरी ओर, NSS कोऑर्डिनेटर ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि कैंप का उद्देश्य केवल सामाजिक सेवा और एकता को बढ़ावा देना था।

स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और 24 घंटे के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है। इस बीच, हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे “जबरन धर्मांतरण की साजिश” करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है।

छात्रों ने मांग की है कि इस तरह की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पर निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ रहा है।

 

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