• 06/08/2025

डीएमएफ घोटाला: सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

डीएमएफ घोटाला: सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) घोटाला मामले में आरोपी व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जायमाला बागची शामिल थे, ने मंगलवार को तिवारी को अंतरिम जमानत दे दी। यह जमानत कोयला परिवहन घोटाले में दी गई अंतरिम जमानत के समान शर्तों पर दी गई है, जिसमें तिवारी को छत्तीसगढ़ से बाहर रहने और जांच एजेंसियों या ट्रायल कोर्ट में जरूरत पड़ने पर ही राज्य में आने की शर्त शामिल है।

क्या है मामला?

डीएमएफ घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की जांच में सामने आया कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड में भ्रष्टाचार हुआ। आरोप है कि राज्य के अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से ठेकेदारों ने सरकारी खजाने से रकम हड़प ली। डीएमएफ एक ट्रस्ट है, जो छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में खनन से प्रभावित लोगों के लाभ के लिए परियोजनाओं और गतिविधियों के लिए स्थापित किया गया है। तिवारी का नाम इस घोटाले के साथ-साथ कोयला परिवहन और शराब घोटाले में भी प्रमुखता से सामने आया है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने तिवारी को डीएमएफ घोटाला मामले में अंतरिम जमानत देते हुए सख्त शर्तें लागू कीं। कोर्ट ने आदेश दिया कि तिवारी छत्तीसगढ़ में तब तक नहीं रह सकते, जब तक जांच एजेंसी या ट्रायल कोर्ट की आवश्यकता न हो। उन्हें रिहाई के एक सप्ताह के भीतर छत्तीसगढ़ से बाहर अपने ठिकाने का पता स्थानीय पुलिस को देना होगा। साथ ही, तिवारी को अपना पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करना होगा और जांच में पूरा सहयोग करना होगा। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर तिवारी गवाहों से संपर्क करने, उन्हें प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।

कोयला घोटाले में भी जमानत बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने तिवारी को कोयला परिवहन घोटाला मामले में मई 2025 में दी गई अंतरिम जमानत को रद्द करने की छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करने के लिए कोई ठोस कारण नहीं मिला। हालांकि, अभियोजन पक्ष को यह छूट दी गई है कि अगर तिवारी द्वारा जमानत की शर्तों का दुरुपयोग करने का कोई सबूत सामने आता है, तो जमानत रद्द करने की मांग फिर से की जा सकती है।

तीन साल से जेल में थे तिवारी

सूर्यकांत तिवारी पिछले तीन साल से रायपुर जेल में बंद थे। उनके खिलाफ कोयला परिवहन घोटाला, शराब घोटाला और डीएमएफ घोटाला सहित तीन मामलों में जांच चल रही है। कोयला घोटाले में ईडी का दावा है कि नौकरशाहों, व्यापारियों और नेताओं के एक कार्टेल ने कोयले के परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की थी। सुप्रीम कोर्ट में तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, शशांक मिश्रा और तुषार गिरी ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पक्ष रखा।

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