• 17/05/2026

भारतीय शेयर बाजार में FPI की भारी बिकवाली, मई में अब तक निकाले 27000 करोड़ से ज्यादा

भारतीय शेयर बाजार में FPI की भारी बिकवाली, मई में अब तक निकाले 27000 करोड़ से ज्यादा

वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का निरंतर बिकवाली का सिलसिला जारी है। मई महीने में अब तक FPI ने शुद्ध रूप से 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इस साल अब तक, कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2.2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर ली है, जबकि 2025 में भी उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बाहर किए थे।

आंकड़ों के अनुसार, इस साल फरवरी को छोड़कर हर महीने FPI ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला है। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये की बिक्री की, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। इसके बाद मार्च में निवेशकों का रुख फिर से बदल गया और 1.17 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी हुई। अप्रैल में भी निवेशकों ने 60,847 करोड़ रुपये बाहर किए। मई में भी यह बिकवाली का सिलसिला जारी है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है

मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर रहने से विकसित बाजारों में निवेश अधिक आकर्षक हो गया है, जिससे निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक महंगाई और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर में संभावित कटौती की अनिश्चितता भी निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

रुपये और बाजार की दिशा

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा कि FPI की निरंतर बिकवाली और चालू खाते के घाटे में वृद्धि से रुपये पर दबाव बना हुआ है। साल की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर पर था, जो अब 15 मई को गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया है। यदि निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये में और कमजोरी आने की संभावना है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत अभी 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में सुधार तभी संभव है जब FPI की बिकवाली थमेगी और वैश्विक आर्थिक स्थिरता लौटेगी। निवेशक इस सप्ताह के लिए निफ्टी के 23,850-23,900 के ऊपर टिकने को जरूरी मान रहे हैं, ताकि तेजी की वापसी संभव हो सके।