• 03/06/2026

‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में स्वस्थ भारत होना बुनियादी जरूरत: जेपी नड्डा

‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में स्वस्थ भारत होना बुनियादी जरूरत: जेपी नड्डा
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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और पास होकर निकले छात्रों को उनके पेशेवर सफर की शुरुआत करने पर बधाई दी। उन्होंने तृतीयक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में संस्थान के बढ़ते योगदान की सराहना की।

जेपी नड्डा ने छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने पर बधाई दी और दूसरे दीक्षांत समारोह को छात्रों, उनके माता-पिता, संकाय सदस्यों और पूरे एम्स बठिंडा परिवार के लिए गर्व और उत्सव का क्षण बताया।

उन्होंने संस्थान की तेजी से हुई प्रगति और इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स बठिंडा आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी मरीजों और लगभग 600 ओपीडी मरीजों का इलाज करता है और साथ ही एम्स ब्रांड से जुड़े उच्च मानकों और विश्वसनीयता को भी बनाए रखता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स बठिंडा की सामुदायिक पहुंच की पहलों की भी सराहना की, जिसमें आसपास के 59 गांवों में हर महीने दो बार ‘आयुष्मान शिविर’ आयोजित करना शामिल है, जहां नागरिकों की मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के लिए जांच की जाती है।

उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवाओं, मोबाइल मेडिकल इकाइयों, ग्रामीण जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य सेवा पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से यह संस्थान केवल अस्पताल-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वास्थ्य सेवा सुधारों के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण मुख्य रूप से ‘उपचारात्मक मॉडल’ से विकसित होकर एक ऐसे व्यापक ढांचे में बदल गया है, जिसमें निवारक, प्रोत्साहक, पुनर्वास, प्रशामक और बुजुर्गों की देखभाल शामिल है।

उन्होंने बताया कि आज 1.82 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संपर्क के पहले बिंदु के रूप में कार्य कर रहे हैं।

नड्डा ने सरकार के निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर देने की बात पर बल देते हुए बताया कि 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से नियमित जांच (स्क्रीनिंग) करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन पहलों के तहत हुई प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 36 करोड़ से अधिक लोगों की मुंह के कैंसर के लिए, 17 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर के लिए और 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है। इसके अलावा 42 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के लिए जांच की गई है, जबकि देशव्यापी तपेदिक (टीबी) जांच अभियान भी चल रहा है।

राष्ट्र निर्माण में स्वास्थ्य के महत्व का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना केवल एक स्वस्थ और कर्मठ आबादी के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि सरकारें बुनियादी ढांचा और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा अंततः डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों के समर्पण, दक्षता और करुणा पर ही निर्भर करती है। डॉक्टरों को स्वास्थ्य प्रणाली की सच्ची ताकत बताते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि बुनियादी ढांचा भले ही स्वास्थ्य सेवा का हार्डवेयर हो, लेकिन स्वास्थ्य पेशेवर ही इसके सॉफ्टवेयर हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के विकास के मामले पंजाब सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं, और उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी प्रकाश डाला।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के चिकित्सा शिक्षा तंत्र में हुए अभूतपूर्व विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो गई है। स्नातक (यूजी) चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 59,000 से बढ़कर 1.28 लाख से अधिक हो गई है और स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों की संख्या लगभग 31,000 से बढ़कर 86,000 से अधिक हो गई है।

उन्होंने आगे बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों में यूजी तथा पीजी चिकित्सा की 75,000 सीटें जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें से लगभग 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों के दौरान पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।

नड्डा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें 2014 में देश को पोलियो-मुक्त घोषित किया जाना और 2015 में मातृ एवं नवजात टिटनेस का उन्मूलन शामिल है। उन्होंने बताया कि अब देश में ट्रेकोमा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय नहीं रहा है, और काला-अजार, कुष्ठ रोग तथा लिम्फैटिक फाइलेरिया के उन्मूलन की दिशा में भी काफी प्रगति हुई है।

एम्स बठिंडा की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नीरजा भाटला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत किया और संस्थान को उनके निरंतर मार्गदर्शन तथा सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को अधिक समावेशी, सुलभ और किफायती बनाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए हैं और इसी क्रम में पूरे देश में एम्स नेटवर्क का विस्तार सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है।

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