- 13/09/2025
नक्सलियों को तगड़ा झटका: कुख्यात नक्सली कमांडर किशनजी की पत्नी का सरेंडर, 1 करोड़ का था इनाम, जानिए कौन है सुजाता, क्यों कहा जा रहा नक्सलियों को बड़ा झटका

छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और बढ़ते दबाव के बीच माओवादी संगठन को एक और करारा प्रहार लगा है। दक्षिण बस्तर क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय कुख्यात महिला नक्सली सुजाता ने तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया है। सुजाता पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, और वह दक्षिण सब जोनल ब्यूरो इंचार्ज के रूप में नक्सलियों की प्रमुख रणनीतिकार रही है। यह आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के मनोबल को तोड़ने वाला साबित होगा, खासकर क्योंकि सुजाता कुख्यात नक्सली कमांडर किशनजी की पत्नी है, जो कुछ वर्ष पहले पश्चिम बंगाल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।

सुजाता का लंबा नक्सली इतिहास
सुजाता, मूल रूप से बंगाल की निवासी, उच्च शिक्षित और बहुभाषी (बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी, ओडिया, तेलुगु, गोंडी और हल्बी) हैं। वह 2000 के दशक से बस्तर संभाग में सक्रिय रही हैं और कई बड़े नक्सली हमलों की साजिश रचने में शामिल रहीं। विशेष रूप से, 2007 के एर्राबोर हमले में, जिसमें 20 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए, सुजाता का प्रमुख हाथ माना जाता है। इसके अलावा, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में कई उच्च प्रोफाइल अपराधों से उसका नाम जुड़ा है। वह बस्तर डिवीजन कमेटी की प्रमुख थी और नक्सलियों के ‘पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी’ (पीएलजीए) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही।

पुलिस के अनुसार, सुजाता दक्षिण बस्तर के ‘रेड ट्रायंगल’ क्षेत्र (मलकानगिरी, सुकमा और बीजापुर) में हथियारों की आपूर्ति, जंगल युद्ध प्रशिक्षण और अंतरराज्यीय समन्वय का काम संभालती थी। हाल के वर्षों में, छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत बस्तर क्षेत्र में 1,570 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले हैं, जिसमें 2025 में ही बीजापुर में 242 से ज्यादा आत्मसमर्पण दर्ज हो चुके हैं। सुजाता का यह कदम उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जो नक्सलवाद के खोखले विचारधारा, आंतरिक कलह और आदिवासियों पर शोषण से निराश होकर लिया गया है।
तेलंगाना DGP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से अधिक जानकारी
सुजाता का आत्मसमर्पण तेलंगाना सीमा के निकट होने के कारण तेलंगाना पुलिस ने इसे संभाला है। तेलंगाना के डीजीपी दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, जिसमें इस मामले की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सुजाता स्वास्थ्य संबंधी कारणों से तेलंगाना के कोठागुडेम क्षेत्र में इलाज के लिए आई थीं, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर उन्हें पकड़ा गया। हालांकि, यह आत्मसमर्पण है, न कि गिरफ्तारी, जैसा कि कुछ पुरानी रिपोर्टों में उल्लेखित था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया, सुजाता के बयान और आगे की कार्रवाई पर प्रकाश डाला जाएगा।
पिछले महीनों में तेलंगाना में भी कई नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है, जैसे अगस्त 2025 में राचकोंडा पुलिस के समक्ष सरेंडर करने वाले काकारला सुनीता और चेन्नुरी हरीश। तेलंगाना सरकार की पुनर्वास योजनाओं ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डीजीपी ने पहले भी बीमार नक्सली नेताओं से आत्मसमर्पण की अपील की थी, जिसमें चिकित्सा सुविधाएं और पुनर्वास का वादा किया गया था।
सुरक्षा बलों की सफलता और नक्सलवाद पर असर
बीजापुर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हो गई है। 2025 में बस्तर डिवीजन में 118 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 792 ने आत्मसमर्पण किया है। हाल ही में कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर चले ऑपरेशन में 7,000 सुरक्षाकर्मियों ने नक्सली बटालियन नंबर 1 को घेरा था, जहां सुजाता सहित कई शीर्ष नेता छिपे थे। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करना है, और यह आत्मसमर्पण उसी दिशा में बड़ा कदम है।





