• 23/08/2025

कौन होगा जिम्मेदार: सरकारी अस्पताल में नर्स की जगह महिला गार्ड ने लगाया इंजेक्शन, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार को लगाई फटकार, मांगा जवाब

कौन होगा जिम्मेदार: सरकारी अस्पताल में नर्स की जगह महिला गार्ड ने लगाया इंजेक्शन, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार को लगाई फटकार, मांगा जवाब
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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला अस्पताल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक महिला गार्ड को मरीज को इंजेक्शन लगाते हुए देखा गया। इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे मरीजों की जान से खिलवाड़ बताया है।

वायरल तस्वीर से खुला मामला

घटना 19 अगस्त 2025 की है, जब पूर्व पार्षद योगेश बघेल अपने भतीजे के इलाज के लिए गरियाबंद जिला अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने देखा कि वार्ड में प्रशिक्षित नर्स की जगह एक महिला गार्ड मरीज को इंजेक्शन लगा रही थी। बघेल ने इस घटना की तस्वीर अपने मोबाइल में कैद कर ली और इसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। तस्वीर वायरल होने से स्वास्थ्य विभाग की जमकर किरकिरी हुई और शासन-प्रशासन की छवि को भी ठेस पहुंची।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने लगाई फटकार

चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, “यह लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है। अगर किसी मरीज की जान चली जाए, तो जिम्मेदार कौन होगा?” कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि अस्पतालों में ऐसी लापरवाही कैसे हो रही है। कोर्ट ने गरियाबंद के कलेक्टर को शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने और घटना की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।

कलेक्टर ने जारी किया नोटिस

वायरल तस्वीर के बाद गरियाबंद के कलेक्टर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. वीएस नवरत्न और सिविल सर्जन डॉ. यशवंत ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह घटना अस्पताल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

“लापरवाही से कमजोर होता है सरकारी अस्पतालों पर भरोसा”

चीफ जस्टिस सिन्हा ने कहा कि ऐसी लापरवाही सरकारी अस्पतालों पर जनता के भरोसे को कमजोर करती है और मरीजों की सुरक्षा को खतरे में डालती है। कोर्ट ने कलेक्टर से पूछा कि नोटिस के बाद क्या कदम उठाए गए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन से चिकित्सा नैतिकता और रोगी देखभाल के प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा।

संस्थागत निगरानी की जरूरत

हाईकोर्ट ने इस घटना को चिकित्सा नैतिकता और पेशेवर मानकों का गंभीर उल्लंघन करार देते हुए संस्थागत निगरानी को मजबूत करने और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं रोगी देखभाल में जवाबदेही तंत्र की विफलता को उजागर करती हैं।

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