• 24/07/2026

डूबते बच्चों को बचाने में गई जान, आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार की नाड़ी वैद्य ने की मदद

डूबते बच्चों को बचाने में गई जान, आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार की नाड़ी वैद्य ने की मदद
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छत्तीसगढ़ में राजिम क्षेत्र के गोबरा नवापारा निवासी प्रदीप कश्यप की नदी में डूब रहे दो बच्चों को बचाने के दौरान मौत हो गई थी। हादसे के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिवार को अभी तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी मदद मुहैया नहीं हो पाई है। अब उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। घटना की जानकारी मिलते ही बालोद के प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य और समाजसेवी बिरेंद्र देशमुख ने उनकी ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। बिरेंद्र देशमुख आज शुक्रवार को उनके गांव पहुंचे और उन्हें 31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस मदद से परिवार को कुछ राहत मिली और उन्होंने नाड़ी वैद्य के प्रति आभार व्यक्त किया।

कैसे हुआ हादसा?

घटना 11 जुलाई की है। दोपहर करीब 2:30 बजे प्रदीप कश्यप अपनी पत्नी मंगला कश्यप के साथ नदी किनारे कपड़े धो रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि दो बच्चे नदी में डूब रहे हैं। बिना कुछ सोचे प्रदीप ने नदी में छलांग लगाई और तैरकर दोनों बच्चों को सुरक्षित उथले पानी तक ले आए। लेकिन बच्चों की जान बचाते-बचाते वो खुद नदी में डूब गए। अगले दिन उनका शव आधा किलोमीटर दूर बरामद हुआ।

गहरे आर्थिक संकट में फंसा परिवार

प्रदीप के परिवार में पत्नी के अलावा तीन नाबालिग बच्चे और एक दिव्यांग भाई हैं। अंतिम संस्कार का सामान बेचकर वो अपने परिवार का लालन-पालन करते थे। प्रदीप की मौत के बाद अब परिवार के सामने जीवनयापन की गंभीर चुनौती है। घर में कोई बचत नहीं होने के कारण परिवार को मजबूरन 13 दिन तक चलने वाला अंतिम संस्कार का कार्यक्रम महज 3 दिन में ही पूरा करना पड़ा।

गरीब-असहायों की करते हैं मदद

बालोद जिले के ग्राम भेड़ी निवासी और मोक्षधाम फाउंडेशन लिमोरा के संस्थापक बिरेंद्र देशमुख समाजसेवा में हमेशा अग्रणी रहते हैं। शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले देशमुख कई स्कूलों को भी आर्थिक सहयोग दे चुके हैं। इससे पहले भी वे भंडेरा (बालोद) में अग्निकांड पीड़ित परिवार को एक लाख रुपए, निकुम (दुर्ग) में एक यादव परिवार को 25 हजार रुपए, जगन्नाथपुर में एक पीड़ित पत्रकार को 25 हजार रुपए, मौरीकला (धमतरी) में साहू परिवार को 51 हजार रुपए और चारवाही (बालोद) में एक गरीब बालिका की शिक्षा हेतु 51 हजार रुपए की मदद कर चुके हैं। इसके अलावा पुर्दा (दुर्ग) के एक स्कूल में कमरा निर्माण के लिए 8 लाख रुपए और बेलोदी स्कूल में मंच निर्माण हेतु टीन शेड के लिए भी सहयोग राशि दे चुके हैं।

“मानवता ही सच्चा मानव धर्म” – बिरेंद्र देशमुख

बिरेंद्र देशमुख का कहना है कि मानव जन्म मिला है तो मानवता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे जरूरतमंद परिवारों को यदि थोड़ी भी मदद मिल जाए, तो वह उनके लिए बड़ा सहारा बन जाती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सेवा कार्य में आगे आना चाहिए और अपनी क्षमता अनुसार सहयोग देना चाहिए। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी भी माध्यम से ऐसी घटना की जानकारी मिलती है, वे तुरंत पीड़ित परिवार तक पहुंचने का प्रयास करते हैं।

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