• 12/07/2025

रेपिस्ट को सर्जरी से बनाया जाएगा नपुंसक.. आजीवन कारावास भी, 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने सुनाई सजा

रेपिस्ट को सर्जरी से बनाया जाएगा नपुंसक.. आजीवन कारावास भी, 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने सुनाई सजा
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मेडागास्कर की एक अदालत ने छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के प्रयास के मामले में दोषी को सर्जिकल तरीके से नपुंसक बनाने और आजीवन कारावास की सजा दी है। हिंद महासागर के इस द्वीप राष्ट्र में यह पहला मामला है, जिसमें सर्जिकल बधियाकरण की सजा सुनाई गई है।

क्या है पूरा मामला?

मामला मेडागास्कर की राजधानी एंटानानारिवो से 30 किलोमीटर पश्चिम में स्थित इमेरिंटसियाटोसिका का है। यहां 2024 में एक व्यक्ति ने छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद उसकी हत्या की कोशिश की। अपील न्यायालय के अटॉर्नी जनरल डिडिएर रजाफिंद्रलाम्बो ने बताया कि इस जघन्य अपराध के बाद आरोपी को कठोर सजा सुनाने का फैसला किया गया।

न्याय मंत्रालय का बयान

मेडागास्कर के न्याय मंत्रालय ने एक वीडियो बयान में कहा कि दोषी को कठोर श्रम के साथ आजीवन कारावास और सर्जरी के जरिए नपुंसक बनाने की सजा दी गई है। यह सजा मेडागास्कर में 2024 में लागू हुए नए कानून के तहत दी गई है, जो 10 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया था। इस कानून का उद्देश्य नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर अंकुश लगाना है, क्योंकि देश की अदालतों में ऐसे मामले बड़ी संख्या में दर्ज थे।

कोर्ट का फैसला: एक चेतावनी

अटॉर्नी जनरल रजाफिंद्रलाम्बो ने कहा कि यह सजा न्याय प्रणाली की ओर से एक मजबूत और कड़ा संदेश है। इसका मकसद ऐसे अपराधियों को चेतावनी देना है, जो बच्चों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण इरादे रखते हैं। उन्होंने इसे समाज में यौन अपराधों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

इन देशों में भी सर्जिकल नपुंसकता

सर्जिकल बधियाकरण की सजा मेडागास्कर में पहली बार लागू की गई है, लेकिन कुछ अन्य देशों में भी इसके उदाहरण मिलते हैं। चेक गणराज्य और जर्मनी में कुछ मामलों में यौन अपराधियों की सहमति से सर्जिकल बधियाकरण किया गया है। हालांकि, मेडागास्कर में इसे अनिवार्य सजा के रूप में लागू करना एक अभूतपूर्व कदम है।

कानून और समाज पर प्रभाव

मेडागास्कर में 2024 में लागू हुआ यह कानून बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा को रोकने के लिए बनाया गया था। सरकार का कहना है कि इस तरह की सख्त सजा से अपराधियों में डर पैदा होगा और समाज में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हालांकि, इस सजा ने मानवाधिकार संगठनों के बीच बहस भी छेड़ दी है, जो सर्जिकल बधियाकरण को मानवीय दृष्टिकोण से विवादास्पद मानते हैं।

 

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