• 21/08/2025

100 साल बाद पितृ पक्ष में पड़ रहे दो ग्रहण, जानें क्या करें और क्या न करें, नहीं तो झेलने पड़ सकते हैं बुरे परिणाम

100 साल बाद पितृ पक्ष में पड़ रहे दो ग्रहण, जानें क्या करें और क्या न करें, नहीं तो झेलने पड़ सकते हैं बुरे परिणाम
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पितृ पक्ष, पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने की पवित्र अवधि, इस साल 7 सितंबर से शुरू हो रही है और 21 सितंबर को समाप्त होगी। इस दौरान परिवारजनों को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, इस बार पितृ पक्ष पर दो ग्रहणों का साया रहेगा, जो 100 साल बाद एक दुर्लभ खगोलीय संयोग है। ऐसे में कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।

पितृ पक्ष पर दो ग्रहणों का प्रभाव

1. चंद्र ग्रहण (7 सितंबर 2025):

पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण के साथ होगी। यह ग्रहण 7 सितंबर को रात 9:58 बजे शुरू होगा और 1:26 बजे समाप्त होगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे खगोलशास्त्र में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल प्रभावी होगा। सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले यानी दोपहर 12:58 बजे से शुरू हो जाएगा।

2. सूर्य ग्रहण (21 सितंबर 2025):

पितृ पक्ष का समापन सूर्य ग्रहण के साथ होगा। यह ग्रहण 21 सितंबर को रात 10:59 बजे शुरू होकर 3:23 बजे तक रहेगा। चूंकि यह रात में होगा, यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भारत में प्रभावी नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण के दौरान बरतें ये सावधानियां

चूंकि 7 सितंबर का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसका सूतक काल प्रभावी होगा। इस दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतें:

  •  सूतक काल में न करें ये कार्य:  सूतक काल (दोपहर 12:58 बजे से रात 1:26 बजे तक) में मंदिर दर्शन, ब्राह्मण भोजन, भोजन पकाना और अन्य धार्मिक कार्य वर्जित हैं।
  •  पितरों के लिए दान:  ग्रहण समाप्त होने के बाद ही पितरों के निमित्त दान करें।
  •  गर्भवती महिलाएं सावधान रहें: सूतक काल और ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें, क्योंकि इसका शिशु पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इस दिन डिलीवरी से बचें।
  •  श्राद्ध कर्म:  पूर्णिमा श्राद्ध पर चंद्र ग्रहण के कारण विशेष सावधानी बरतें। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही श्राद्ध और तर्पण करें।

सूर्य ग्रहण का प्रभाव

21 सितंबर का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल प्रभावी नहीं होगा। इस दिन सामान्य रूप से श्राद्ध और तर्पण किए जा सकते हैं।

क्यों खास है यह पितृ पक्ष?

इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत और समापन ग्रहण के साथ हो रहा है, जो 100 साल बाद होने वाला दुर्लभ संयोग है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किए गए कार्य परिवार को सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। लेकिन ग्रहण के प्रभाव के कारण इस बार विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

क्या करें?

– ग्रहण समाप्त होने के बाद ही पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और दान करें।
– ग्रहण के दौरान हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्रनाम या अन्य मंत्रों का जाप करें।
– ग्रहण के बाद घर और मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।

पितृ पक्ष में सावधानी और श्रद्धा के साथ कार्य करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होगा और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

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