• 22/07/2025

एक फोन कॉल.. तीखी बहस और फिर… धनकड़ के इस्तीफे की क्या है इनसाइड स्टोरी

एक फोन कॉल.. तीखी बहस और फिर… धनकड़ के इस्तीफे की क्या है इनसाइड स्टोरी
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भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को मॉनसून सत्र के पहले दिन अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपे पत्र में स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सीय सलाह का पालन करने की बात कही, लेकिन इस्तीफे की टाइमिंग और परिस्थितियों ने सियासी हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इसे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्षी प्रस्ताव और केंद्रीय मंत्रियों की अनुपस्थिति से जोड़ा, जबकि सूत्रों ने केंद्र के साथ तनाव की ओर इशारा किया।

74 वर्षीय धनखड़ मार्च 2025 में हृदय संबंधी समस्या के कारण एम्स में भर्ती हुए थे, लेकिन सोमवार को वे संसद में सक्रिय दिखे। इससे विपक्ष ने स्वास्थ्य कारणों पर संदेह जताया और सियासी दबाव की अटकलें तेज हो गईं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफे के पीछे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार करना एक बड़ा कारण हो सकता है। जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद 68 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था। धनखड़ ने इसे स्वीकार कर लिया और राज्यसभा के महासचिव को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। सूत्रों का कहना है कि यह कदम केंद्र को रास नहीं आया, क्योंकि सरकार इस मुद्दे पर पहले लोकसभा में प्रस्ताव लाकर न्यायपालिका के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना चाहती थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र ने धनखड़ से इस मुद्दे पर फोन पर बात की, जो तीखी बहस में बदल गई। सूत्रों ने बताया कि धनखड़ ने अपने संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया, जिसके बाद सरकार की ओर से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा शुरू हुई। इसकी भनक लगते ही धनखड़ ने इस्तीफा देना बेहतर समझा।

नड्डा और रिजीजू की अनुपस्थिति ने बढ़ाया विवाद

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने धनखड़ के इस्तीफे को “हैरान करने वाला और अस्पष्ट” बताते हुए केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और किरेन रिजीजू की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। रमेश ने कहा कि धनखड़ ने दोपहर 12:30 बजे BAC की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें नड्डा और रिजीजू मौजूद थे। बैठक में शाम 4:30 बजे दोबारा मिलने का फैसला हुआ, लेकिन दोनों मंत्री बिना सूचना के अनुपस्थित रहे। रमेश ने दावा किया कि धनखड़ ने इसकी नाराजगी जताई और बैठक को मंगलवार दोपहर 1 बजे के लिए पुनर्निर्धारित किया। उन्होंने कहा, “1 बजे से 4:30 बजे के बीच कुछ गंभीर घटना हुई, जिसके कारण नड्डा और रिजीजू जानबूझकर अनुपस्थित रहे।”

नड्डा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने और रिजीजू ने अन्य संसदीय व्यस्तताओं के कारण अनुपस्थिति की सूचना पहले ही दे दी थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका “जो मैं कहूं, वही रिकॉर्ड पर जाएगा” वाला बयान विपक्षी सांसदों के लिए था, न कि धनखड़ के लिए।

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