• 03/05/2026

बगिया से बस्तर तक गूंजा सुशासन का स्वर-जनता से सीधा संवाद बना विश्वास का आधार

बगिया से बस्तर तक गूंजा सुशासन का स्वर-जनता से सीधा संवाद बना विश्वास का आधार
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00 40 दिवसीय ‘सुशासन तिहार’ में गांव-गांव पहुंच रहा प्रशासन(लेखक-एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
रायपुर। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। सरकारें योजनाएं बनाती हैं, बजट प्रस्तुत करती हैं और विकास के दावे करती हैं, लेकिन इन सबकी सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचे और लोग स्वयं अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस करें। छत्तीसगढ़ में इसी सोच को साकार करने के लिए ‘सुशासन तिहार’ जैसे अभिनव अभियान की शुरुआत की गई है।
1 मई से 10 जून तक चलने वाला यह 40 दिवसीय अभियान शासन को सीधे जनता के द्वार तक ले जाने का एक प्रभावी प्रयास है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी गांव-गांव और शहरों के वार्डों में पहुंचकर आमजन की समस्याएं सुन रहे हैं और उनका समाधान कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह पहल केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, सहभागिता और समाधान पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की इस अभियान में सक्रिय भागीदारी इसे और अधिक प्रभावशाली बनाती है। उनका विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जमीनी हकीकत का आकलन करना और आम जनता से सीधा संवाद करना यह दर्शाता है कि नेतृत्व केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी प्रतिबद्ध है। तेज गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच उनकी यह सक्रियता प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक प्रेरणा है।

‘सुशासन तिहार’ का मूल उद्देश्य शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाना है। जब अधिकारी सीधे गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं, तो न केवल वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है, बल्कि लोगों के भीतर यह विश्वास भी मजबूत होता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है। इस प्रकार की पहल प्रशासन में संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व दोनों को सुदृढ़ करती है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ‘लोगों की सुनें, उन्हें सुनाएं नहीं’ की भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार ही शासन की छवि तय करता है। इसलिए आमजन के साथ संवाद करते समय शालीनता, धैर्य और सम्मान अनिवार्य होना चाहिए। जब कोई नागरिक शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह अनुभव होना चाहिए कि उसकी बात गंभीरता से सुनी जा रही है।
प्रदेश में आयोजित समाधान शिविर इस अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर लोगों से आवेदन लेकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। इसमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे शासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।
हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता उसके दीर्घकालिक प्रभाव और निरंतरता पर निर्भर करती है। निश्चित ही राज्य सरकार ‘सुशासन तिहार’ से प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी सुधार करेंगे और यह संवाद की यह प्रक्रिया भी लगातार जारी रहेगी। ‘सुशासन तिहार’ एक अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इस बात का संकेत है कि यदि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता बनी रहे, तो विकास की राह न केवल सशक्त होती है, बल्कि अधिक समावेशी बनेगी।

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