• 21/10/2022

धनतेरस पर 27 साल बाद बन रहा ये खास संयोग, शुभ खरीदारी के लिए ये हैं विशेष योग, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

धनतेरस पर 27 साल बाद बन रहा ये खास संयोग, शुभ खरीदारी के लिए ये हैं विशेष योग, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
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भारत में दिवाली का त्योहार पूरे 5 दिनों तक मनाया जाता है. इसकी शुरुआत धनतेरस या धनत्रयोदशी से होती है और यह भैय्या दूज के साथ समाप्त होता है, धनतेरस क्यों मनाते हैं और क्या है सही तारीख ये सवाल सभी के मन में होता है. ऐसे में हम आपको बताएंगे कि कैसे धनतेरस मनाएं…

मां लक्ष्मी और कुबेर की करें पूजा

दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. कहा जाए तो धनतेरस के दिन से ही दिवाली के पंचमहोत्सव की शुरुआत मानी जाती है. इस साल दिवाली 24 अक्टूबर और धनतेरस 23 अक्टूबर को पड़ेगी. धनतेरस के दिन धन के देवता धनपति कुबेर देव की पूजा की जाती है. इन्हें धन-वैभव की देवी मां लक्ष्मी का भाई माना जाता है. धनलाभ की कामना रखने वाले लोगों को मां लक्ष्मी के साथ ही कुबेर देव की पूजा भी जरूर करनी चाहिए. कुबेर देव को देवताओं के धन संपत्ति का खजांची कहा गया है. इन्हें देवताओं द्वारा धन की रक्षा करने की जिम्मेदारी प्राप्त होती है. इसलिए धनतेरस पर पूरे विधि-विधान के साथ कुबेर देव की पूजा जरूर करें.

धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त

धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा त्रयोदशी तिथि के दौरान प्रदोष काल में करने का विधान होता है. इस साल कार्तिक महीने की कृष्ण त्रयोदशी तिथि 22 अक्तूबर की शाम 6.02 बजे प्रारंभ हो रही हैं और अगले दिन यानी 23 अक्तूबर की शाम 6.03 बजे समाप्त हो जाएगी, फिर चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी. हिंदू धर्म में कोई भी व्रत या त्योहार उदया तिथि के आधार ही मनाई जाती है. ऐसे में त्रयोदशी की उदया तिथि 23 अक्तूबर को है.

ऐसे करें कुबेर देव की पूजा

धनतेरस पर कुबेर देव की पूजा के लिए पंचोपचार विधि को अपनाएं. इसमें पूजा के लिए पांच चरण महत्वपूर्ण माने जाते हैं. पूजा में सबसे पहले आचमन, फिर ध्यान, फिर जाप, इसके बाद आहुति होम और आखिर में आरती करने का विधान होता है. पंचोपचार विधि से पूजा करने पर कुबेर देव प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अलावा पूजा में कुबेर देव को चंदन, धूप, फूल, दीप, नैवेद्य और भोग आदि जरूर अर्पित करें. साथ ही कुबेर देव के विशेष मंत्रों का जाप भी करें. पूजा के आखिर में क्षमा याचना करनी चाहिए.

बन रहा त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.सर्वार्थ सिद्धि योग पर राहुकाल का असर नहीं होता है. ऐसे में खरीदारी करना फलदायक होता है. सर्वार्थ सिद्धि योग 23 अक्टूबर को सुबह 6.32 बजे से शुरु होकर दोपहर 2.33 बजे पर समाप्त हो जाएगा. वहीं त्रिपुष्कर योग दोपहर 01.50 से शाम 06.02 बजे तक रहेगा. इन मुर्हूतों में खरीददारी करना बेहद लाभप्रद रहेगा.

क्या पौराणिक मान्यताएं

हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था. धनतेरस पर सोना-चांदी,आभूषण और बर्तन की खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना गया है. धनतेरस पर खरीदी गई चीजों में तेरह गुने की वृद्धि होती है, ऐसी पौराणिक मान्यताएं हैं.

क्यों मनाया जाता है धनतेरस

शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. जिस तिथि को भगवान धन्वंतरि समुद्र से निकले, वह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी. भगवान धन्वंतरि समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा चली आ रही है. भगवान धन्वंतरि को विष्णु भगवान का अंश माना जाता है और इन्होंने ही पूरी दुनिया में चिकित्सा विज्ञान का प्रचार और प्रसार किया. भगवान धन्वंतरि के बाद माता लक्ष्मी दो दिन बाद समुद्र से निकली थीं इसलिए उस दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है. इनकी पूजा-अर्चना करने से आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है.

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