• 03/08/2025

411 करोड़ का दवा घोटाला, 7 जेल में.. कई और होंगे गिरफ्तार, ED की राडार पर ये IAS अफसर, दोबारा होगी पूछताछ

411 करोड़ का दवा घोटाला, 7 जेल में.. कई और होंगे गिरफ्तार, ED की राडार पर ये IAS अफसर, दोबारा होगी पूछताछ
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छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में 411 करोड़ रुपये से अधिक के दवा और री-एजेंट घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) से जुड़े इस घोटाले में मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा सहित सात लोगों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। ED अब वरिष्ठ IAS अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी में है और कोर्ट से अनुमति लेकर जेल में बंद अधिकारियों व व्यापारियों से सवाल-जवाब करेगी। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही कुछ बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

ED की रडार में ये अधिकारी

जांच में ED ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को निशाने पर लिया है, जिनमें भीम सिंह, चंद्रकांत वर्मा, मीनाक्षी गौतम, बसंत कौशिक, डॉ. अनिल परसाई, क्षिरौंद्र रावटिया, कमलकांत पाटनवार, आनंद राव और एक IFS अधिकारी शामिल हैं। ED ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में 18 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें मोक्षित कॉर्पोरेशन और CGMSC के अधिकारियों के परिसर शामिल थे। जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर ED ने यह कार्रवाई की।

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?

दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, CBI और ED मुख्यालय में CGMSC में हुए घोटाले की शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को जांच के निर्देश दिए। EOW ने पांच लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की, जिसमें मोक्षित कॉर्पोरेशन के निदेशक शशांक चोपड़ा को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया।

टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर

EOW की जांच रिपोर्ट के अनुसार, CGMSC के अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए, जबकि मेडिकल किट और उपकरणों की तत्काल जरूरत नहीं थी। मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत कर शर्तें तय कीं, जिससे अन्य कंपनियां दौड़ से बाहर हो गईं। इस योजनाबद्ध तरीके से इन फर्मों को टेंडर मिले, जिससे राज्य के खजाने को 550 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

ED और EOW की कार्रवाई

ED ने PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम) के तहत जांच शुरू की और मोक्षित कॉर्पोरेशन से संबंधित दस्तावेज EOW से प्राप्त किए। जांच में खुलासा हुआ कि शशांक चोपड़ा ने CGMSC और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) के अधिकारियों को प्रलोभन देकर अनुचित तरीके से 500 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर हासिल किए। EOW ने भी इस मामले में पांच अधिकारियों और शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया था।

आगे क्या?

EOW और ED अब घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं। EOW ने दो अधिकारियों से पूछताछ पूरी कर ली है और अन्य अधिकारियों से सवाल-जवाब की प्रक्रिया तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है, जिससे छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल मची हुई है।

 

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