• 16/09/2025

SECL कुसमुंडा खदान में ब्लास्टिंग से 5 गांव प्रभावित, घरों में दरारें, आक्रोशित ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेरा

SECL कुसमुंडा खदान में ब्लास्टिंग से 5 गांव प्रभावित, घरों में दरारें, आक्रोशित ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेरा
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कुसमुंडा कोयला खदान में मंगलवार सुबह 8:15 बजे हैवी ब्लास्टिंग की गई। इस ब्लास्ट से जटराज, सोनपुरी, पाली, पडनिया समेत 5 आसपास के गांव प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग को नियमों के खिलाफ बताते हुए नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि ब्लास्ट के समय 3 किलोमीटर के दायरे को खाली नहीं कराया गया, जिससे एक ग्रामीण के घर में दरारें आ गईं। विरोध में ग्रामीणों ने SECL और प्रशासन की टीम को घेर लिया।

ब्लास्टिंग का विवरण: सुबह-सुबह अनियमित विस्फोट

ग्रामीणों के अनुसार, नियमानुसार ब्लास्टिंग दोपहर 2 बजे की जानी चाहिए थी, लेकिन सुबह ही कर दी गई। हैवी ब्लास्टिंग से धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी और धूल का गुबार उठा। जटराज गांव में एक घर की दीवार में दरारें पड़ गई हैं। सरपंच को भी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। नियमों के मुताबिक, ब्लास्टिंग से पहले 3 किलोमीटर के दायरे को खाली कराना अनिवार्य है, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। इससे ग्रामीणों में डर का माहौल है।

पुलिस और प्रशासन के अनुसार, SECL कुसमुंडा खदान देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक है, जहां सालाना 50 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन होता है। लेकिन ब्लास्टिंग की अनियमितता से पर्यावरणीय और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।

ग्रामीणों का विरोध: अधिकारियों को घेरा, त्रिपक्षीय वार्ता को धोखा बताया

ब्लास्टिंग के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए और SECL अधिकारियों को मौके पर घेर लिया। इसी बीच, हरदीबाजार हॉस्पिटल मोहल्ले में जमीन नापने पहुंची SECL और प्रशासन की टीम को भी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने तहसील पाली में हुई त्रिपक्षीय बैठक को धोखा बताते हुए नारेबाजी की। उनका कहना है कि SECL ने उनकी जमीन अधिग्रहण कर ली, लेकिन न तो उचित मुआवजा दिया गया, न नौकरी या पुनर्वास की सुविधाएं प्रदान की गईं।

मौके पर सरपंच लोकेश्वर कंवर, पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर और भाजपा जिला मंत्री अजय दुबे मौजूद थे। विरोध के कारण टीम को पीछे के रास्ते से दीपका हाउस लौटना पड़ा। प्रभावित ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों का आरोप है कि SECL ने बिना लिखित सहमति के ही नापजोख शुरू कर दी।

मुआवजा और नौकरी की 7 सूत्रीय मांगें

ग्रामवासियों ने त्रिपक्षीय बैठक में 7 सूत्रीय मांगें रखी थीं, जिनमें शामिल हैं:

  •  उचित मुआवजा।
  •  प्रभावित परिवारों को नौकरी।
  •  सुविधाओं वाली बसाहट (पुनर्वास)।
  •  ब्लास्टिंग नियमों का सख्त पालन।
  •  पर्यावरणीय क्षति का मुआवजा।
  •  पूर्व अधिग्रहित जमीन का हिसाब।
  •  सुरक्षा उपायों में सुधार।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। SECL ने लंबे समय से कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए विस्तार की योजना चला रही है, लेकिन इससे प्रभावित गांवों में असंतोष बढ़ रहा है।

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