• 16/09/2025

छत्तीसगढ़ में करंट से एक ही परिवार के 3 की मौत, पिता को बचाने गया बेटा और फिर मां की भी गई जान, पसरा मातम

छत्तीसगढ़ में करंट से एक ही परिवार के 3 की मौत, पिता को बचाने गया बेटा और फिर मां की भी गई जान, पसरा मातम
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छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम खैरी पांगरी (पागरी) गांव में एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों—मां, पिता और बेटे—की बिजली के करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना सोमवार शाम की है, जिसके बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है। परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शवों का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए अंबागढ़ चौकी भेज दिया है।

पिता को बचाने पहुंचे बेटे और फिर मां की भी गई जान

पाटन खास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खैरी पांगरी गांव में रहने वाले गोड आदिवासी बोगा परिवार का यह दुखद हादसा हुआ। परिवार के मुखिया सुरतराम बोगा (62 वर्ष) सोमवार शाम 6 से 7 बजे के बीच गांव से लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित कोठार बाड़ी (खेत की बाड़ी) पर गए थे। वहां अचानक बिजली के करंट की चपेट में आ गए और तार से चिपक गए। पिता को इस हालत में देख उनके बेटे रूपलाल बोगा (27 वर्ष) उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन वे भी करंट के आगोश में फंस गए।

पिता-पुत्र के घर न लौटने पर चिंतित होकर मां भागबती बाई (58 वर्ष) भी कोठार बाड़ी पर पहुंचीं। वहां पहुंचते ही वे भी बिजली के करंट की चपेट में आ गईं। हादसा इतना भीषण था कि तीनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। आसपास के ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली, तो वे बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे और तत्काल पाटन खास थाना पुलिस को सूचना दी।

पाटन खास थाना प्रभारी गणेश यादव ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शवों का पंचनामा किया गया और उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए अंबागढ़ चौकी ले जाया गया। प्रारंभिक जांच में बिजली के तारों की लापरवाही या खराब इंसुलेशन को मौत का कारण माना जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारण स्पष्ट होगा। पुलिस ने विद्युत विभाग को भी सूचित कर दिया है।

गांव में पसरा मातम: तीनों शवों का अंतिम संस्कार

इस दुखद घटना से बोगा परिवार टूट गया है। एक ही परिवार से तीन सदस्यों की मौत ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरतराम बोगा परिवार के मुखिया थे और खेती-बाड़ी से परिवार चलाते थे। रूपलाल युवा थे और परिवार का सहारा थे। भागबती बाई घर संभालती थीं। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे माहौल और गमगीन हो गया।

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