• 30/08/2024

DPS Rape case में डेढ़ महीने बाद भी FIR नहीं, कांग्रेस ने की हाईकोर्ट जज से जांच की मांग, लेन-देन का आरोप, पूर्व CM ने SP पर लगाए गंभीर आरोप

DPS Rape case में डेढ़ महीने बाद भी FIR नहीं, कांग्रेस ने की हाईकोर्ट जज से जांच की मांग, लेन-देन का आरोप, पूर्व CM ने SP पर लगाए गंभीर आरोप
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छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थित नामी गिरामी डीपीएस स्कूल में 5 साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के मामले में डेढ़ महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब कांग्रेस ने इस मामले में मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने दुर्ग एसपी पर मामला दबाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने डीपीएस के प्रिंसिपल प्रशांत वशिष्ठ का पॉलीग्राफ टेस्ट और हाईकोर्ट के सीटिंग जज से मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।

एसपी ने मामला दबाया

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने को तगड़े लेन-देन का मामला बताया है। उन्होंने इस पूरे मामले में दुर्ग एसपी जितेंद्र शुक्ला की भूमिका पर भी सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि 4 साल की बच्ची से दुराचार हुआ है लेकिन जांच हो गई कहकर एसपी ने मामला दबा दिया।

भूपेश बघेल ने कहा कि 5 जुलाई को 4 साल की बच्ची की तबियत खराब होती है। बच्ची की डॉक्टरी जांच होती है तो मेडिकल रिपोर्ट में लिखा है कि उसके प्राइवेट पार्ट में जख्म है। ज़ख्म ठीक नहीं होने पर 15 दिन बाद  20 जुलाई को एक और हॉस्पिटल में उसकी जांच होती है। पता चलने पर 2 अगस्त को पालक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। पालक स्कूल का घेराव करते हैं तो प्रिंसिपल कहते हैं कि मैं ने जांच की है कोई अपराध नहीं पाया है।

पॉक्सो के तहत पहले FIR फिर जांच

एसपी के दो बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं। सोशल मीडिया ग्रुप में वो भी हैं, वो कहते हैं कि मैं ने जांच की लेकिन कोई गलत नहीं पाया गया। मीडिया में बात आने के बाद एसपी के संज्ञान में आने के बाद भी वो कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। पॉक्सो एक्ट में प्रावधान है पहले एफआईआर करना है उसके बाद जांच करना है। इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुआ है।

बड़ी बेशर्मी के साथ एसपी दुर्ग कहते हैं कि इसमें कोई तथ्य नहीं है और पालक भी एफआईआर नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि ऐसा कौन सा पालक होगा जो जिसके बच्चे के साथ दुराचार हो और वो अपराधी के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहेगा। पालक दबाव में हैं। आवेदक आवेदन करे न करे अगर पुलिस अधीक्षक से संज्ञान में आ गया था तो उसे सुओ मोटो एफआईआर लेना था। और बिना एफआईआर के जांच कैसे हो गई।

सरकार की जानकारी में है फिर भी कार्रवाई नहीं

ये मामला सरकार के भी संज्ञान में है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को भाजयुमो पदाधिकारियों ने ज्ञापन दिया था। जब यह बात मंत्री के जानकारी में आ गई तो इसका मतलब सरकार की भी जानकारी में यह बात है। उसके बाद भी इसे दबा दिया गया है। बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसे दबा दिया गया है।

मेडिकल बोर्ड से जांच क्यों नहीं कराई?

दो डॉक्टरों ने जांच की दोनों की रिपोर्ट एक जैसी ही है। सवाल यह है कि डॉक्टरों का पैनल बनाकर मेडिकल बोर्ड से जांच क्यों नहीं कराई गई? एसपी खुद ही सर्टिफिकेट दे दिए। कभी वो पालक बन जाते हैं, कभी वो अधीक्षक बन जाते हैं कभी वो जज भी बन जाते हैं, उन्होंने फैसला भी दे दिया।

देखिए पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस

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