• 27/02/2025

‘ये तो खुला करप्शन है’; 653 गांव में जल स्रोत नहीं.. पाइप लाइन बिछाकर बना दी गई टंकी, जल जीवन मिशन पर सदन में भिड़े BJP विधायक और मंत्री

‘ये तो खुला करप्शन है’; 653 गांव में जल स्रोत नहीं.. पाइप लाइन बिछाकर बना दी गई टंकी, जल जीवन मिशन पर सदन में भिड़े BJP विधायक और मंत्री
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छत्तीसगढ़ में बजट सत्र के तीसरे दिन जल जीवन मिशन में गड़बड़ी का मामला एक बार फिर सदन में गूंजा। सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने अपने सवालों से पीएचई मंत्री अरुण साव को घेरा। चंद्राकर ने योजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जल स्रोत नहीं होने के बावजूद पाइप लाइन बिछाकर पानी टंकी बना दी गई, जो कि खुला करप्शन है। उन्होंने मंत्री से सवाल किया कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर अधिकारियों और तत्कालीन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी?

अजय चंद्राकर ने पीएचई मंत्री से सवाल करते हुए पूछा कि प्रदेश में जल स्रोत विहीन ऐसे कितने गांव हैं, जहां पाइप लाइन बिछा दी गई और टंकी बना दी गई है?

जिस पर पीएचई मंत्री ने बताया कि जल स्रोत विहीन गांवों की संख्या 653 हैं। जिसमें 1,32,717 घर हैं जहां नल का कनेक्शन हुआ है।

चंद्राकर ने कहा कि बिना जल स्रोत के क्या पाइप लाइन और टंकी बनाई जा सकती है। कार्यपालन अभियंता या जिला स्वच्छता समिति में जो हैं जिन्होंने इसका अनुमोदन दिया है, क्या वो बिना जल स्रोत के अनुमोदन दे सकते हैं?

जिसके जवाब में मंत्री ने कहा कि जब प्रारंभिक तौर पर डीपीआर बना तो ग्राम सभा से डीपीआर का अनुमोदन हुआ और जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने उसका अनुमोदन किया। हर एक योजना में एक जल स्रोत चिन्हित था, जिससे काम आगे बढ़ा। अप्रैल 2023 से ट्यूबवेल का टेंडर हुआ, इसलिए प्रोग्रेस दिखाने के लिए भी काम चला।

जिस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि डीपीआर में जल स्रोत नहीं था तो उसके बाद पाइल लाइन और टंकी बनाया गया। ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे या नहीं?

जवाब में पीएचई मंत्री ने बताया कि 26 हजार करोड़ से ज्यादा की योजना है। अभी 13 हजार करोड़ रुपये व्यय हुआ है। पचास प्रतिशत व्यय हुआ है। काम पूर्ण नहीं हुआ है।

इसी दौरान भूपेश बघेल खड़े होकर कहा अध्यक्ष महोदय ये दोनों (अजय चंद्राकर और अरुण साव) खड़े हो जाते हैं। निर्देश करें कि एक बोले तो दूसरा बैठ जाए। चंद्राकर ने कहा ये सब आपके समय की ही कलाकारी है जिसको वो भोग रहे हैं।

योजना बनाने पर DPR में जल स्रोत नहीं होने के बावजूद पानी टंकी बना दी ई और पाइपलाइन बिछा दी गई, ये तो खुला करप्शन है। ऐसी जगहों को चिन्हांकित करके क्या कार्रवाई करेंगे ऐसे अधिकारियों या तत्कालीन लोगों पर ?

जिसके जवाब में पीएचई मंत्री अरुण साव ने कहा कि जब तक काम पूरा नहीं होगा तब तक किसी भी ठेकेदार को 70 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान नहीं करेंगे। जब तक योजना पूरी तरह से संचालित नहीं होगी तब तक भुगतान नहीं होगा। जल स्रोत नहीं पाया गया और योजना पूरी नहीं हुई तो संबंधित लोगों के खिलाफ निश्चित रुप से कड़ी कार्यवाही करेंगे।

अजय चंद्राकर फिर सवाल करने खड़े हुए, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन ने कहा कि मंत्री ने कह तो दिया कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे। जिस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि एक साल कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुन ही रहा हूं, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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