• 21/05/2025

एनकाउंटर: बीटेक की डिग्री.. कबड्डी खिलाड़ी, छात्र नेता से बना नक्सलियों का टॉप लीडर, गुरिल्ली युद्ध और IED बनाने में एक्सपर्ट, NIA का वो मोस्ट वांटेड जिस पर था 1.5 करोड़ का इनाम, जानें कौन था बसवा राजू

एनकाउंटर: बीटेक की डिग्री.. कबड्डी खिलाड़ी, छात्र नेता से बना नक्सलियों का टॉप लीडर, गुरिल्ली युद्ध और IED बनाने में एक्सपर्ट, NIA का वो मोस्ट वांटेड जिस पर था 1.5 करोड़ का इनाम, जानें कौन था बसवा राजू
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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में 21 मई 2025 को सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन में 30 नक्सलियों को मार गिराया, जिसमें कुख्यात नक्सली नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू उर्फ बसवराज उर्फ गगन्ना भी ढेर हो गया। बसवराज पर डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम था और वह नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) का महासचिव था। इस मुठभेड़ को नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

कौन था नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज?

नंबाला केशव राव, जिसे बसवराजू, बसवराज, गगन्ना, प्रकाश, नरसिम्हा, और दारापु नरसिम्हा रेड्डी जैसे कई उपनामों से जाना जाता था, का जन्म 1955 में आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के जियन्नापेट गांव में हुआ था। वह एक इंजीनियरिंग स्नातक था और उन्होंने वारंगल के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, NIT) से बी.टेक की डिग्री हासिल की थी। कॉलेज के दिनों में वह कबड्डी खिलाड़ी था और वामपंथी छात्र राजनीति में सक्रिय थे, जहां वह रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) से जुड़ा। 1970 के दशक में वह नक्सली आंदोलन से जुड़ गया और बाद में भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा।

लिट्टे के लड़ाकों से ट्रेनिंग

बसवराज 1980 में श्रीकाकुलम में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन और आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच झड़प के दौरान एकमात्र बार गिरफ्तार हुए थे। इसके बाद वह भूमिगत हो गए और नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे। 1987 में, उन्होंने बस्तर के जंगलों में श्रीलंका के लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के पूर्व लड़ाकों से गुरिल्ला युद्ध और विस्फोटकों के उपयोग की ट्रेनिंग ली थी।

नक्सली संगठन में भूमिका

2004 में भाकपा (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) पीपुल्स वॉर और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) के विलय से बने भाकपा (माओवादी) में बसवराज को केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) का प्रमुख बनाया गया। इस भूमिका में वह संगठन की सशस्त्र शाखा, पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA), की गतिविधियों को निर्देशित करते थे। उनकी विशेषज्ञता गुरिल्ला युद्ध रणनीति और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) के निर्माण और उपयोग में थी। नवंबर 2018 में, मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के इस्तीफे के बाद वह भाकपा (माओवादी) के महासचिव बने, जो संगठन का सर्वोच्च पद था।

बसवराज को कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था, जिनमें शामिल हैं:

  • 2010 दंतेवाड़ा हमला: जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए।
  • 2013 जीरम घाटी हमला: जिसमें 27 लोग मारे गए, जिनमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और कांग्रेस नेता नंद कुमार पटेल शामिल थे।
  • 2018 अराकू हमला: आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी के विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवेरी सोमा की हत्या।
  • 2019 गढ़चिरौली हमला: महाराष्ट्र में 15 कमांडो और एक नागरिक की हत्या।

डेढ़ करोड़ का इनाम और सुरक्षा एजेंसियों की तलाश

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, और महाराष्ट्र की पुलिस ने बसवराज पर डेढ़ करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित किया था। वह NIA की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसकी सैन्य रणनीति और विस्फोटकों में महारत के कारण वह सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा खतरा था। वह अपने आंदोलन को मार्क्सवादी-लेनिनवादी-माओवादी विचारधारा से प्रेरित मानता था और आदिवासी क्षेत्रों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा संसाधनों के शोषण के खिलाफ लड़ाई का दावा करता था।

अबूझमाड़ मुठभेड़ और अंत

21 मई 2025 को नारायणपुर के अबूझमाड़ में डीआरजी और अन्य सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर एक ऑपरेशन शुरू किया। इस मुठभेड़ में बसवराज सहित 30 नक्सली मारे गए। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसकी पुष्टि की, हालांकि जब्त हथियारों की जानकारी अभी साझा नहीं की गई है। इस ऑपरेशन में एक सुरक्षाकर्मी शहीद हुआ और एक जवान घायल हुआ। सूत्रों के अनुसार, बसवराज मुठभेड़ के बाद अबूझमाड़ के जंगलों में छिपा हुआ था, लेकिन डीआरजी ने उसे ढेर कर दिया।

नक्सलवाद के खिलाफ मील का पत्थर

बसवराज का खात्मा नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उसकी मृत्यु से भाकपा (माओवादी) को गहरा झटका लगा है, क्योंकि वह संगठन का प्रमुख रणनीतिकार और सैन्य नेता था। यह ऑपरेशन केंद्र सरकार के 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान को मजबूती दी है।

 

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