• 21/08/2026

खस से बनी अनोखी राखियां, पानी की बूंद पड़ते ही बिखेरेंगी खुशबू, बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई : वन मंत्री केदार कश्यप

खस से बनी अनोखी राखियां, पानी की बूंद पड़ते ही बिखेरेंगी खुशबू, बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई : वन मंत्री केदार कश्यप
Spread the love

रायपुर: खस की जड़ों से बनी अनोखी और पर्यावरण-कल अनुकूल राखियां पानी की एक बूंद पड़ते ही अपनी प्राकृतिक और सोंधी खुशबू बिखेरने लगती हैं। ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से बनी और बायोडिग्रेडेबल होती हैं, जो त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।

इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि अपनी खुशबू से एक अनोखा एहसास भी कराएंगी। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक औषधीय एवं सुगंधित पौधों से जुड़ी स्थानीय प्रतिभा और हुनर को बढ़ावा देते हुए खस से विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है। इन राखियों की खासियत यह है कि पानी की बूंद पड़ने, नमी आने या गीली होने पर इनमें से मनमोहक खुशबू निकलती है। यानी अब भाइयों की कलाई महकेगी बहन के प्यार से।

वन मंत्री  केदार कश्यप की संवेदनशील पहल से परंपरा और नवाचार का संगम

वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी संवेदनशील पहल को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय  स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस जैसी सुगंधित वनस्पति के उपयोग से राखियों को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

बोर्ड अध्यक्ष  विकास मरकाम और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं द्वारा 1000 तैयार की गई है। ये राखियां परंपरागत भावनाओं को आधुनिक सोच से जोड़ने का सुंदर उदाहरण हैं। इनमें छत्तीसगढ़ की वन संपदा, स्थानीय हुनर और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशबू एक साथ महसूस की जा सकती है।

पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी राखी

खस से बनी इन राखियों की सबसे खास विशेषता उनकी प्राकृतिक खुशबू है। सामान्य राखियां जहां केवल कलाई की शोभा बढ़ाती हैं, वहीं ये विशेष राखियां नमी के संपर्क में आने पर अपनी सुगंध बिखेरती हैं। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठती खुशबू भाई को बहन के स्नेह का अनोखा एहसास कराएगी।

वन संपदा से रोजगार और नवाचार की नई राह

इन राखियों का निर्माण केवल रक्षाबंधन के त्योहार को खास बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से तैयार उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

राखी में रिश्तों की मिठास और छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू

इस नवाचार के संदर्भ में वन मंत्री श्री केदार कश्यप कहते हैं कि सचमुच ! इस रक्षाबंधन में बहनों का प्यार बांधेगा राखी, और महकेगी भाइयों की कलाई। इस बार जब बहन अपने भाई की कलाई पर खस से बनी यह राखी बांधेगी, तो उसके साथ सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा स्नेह भी बंधेगा। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी, तो भाई को बहन के प्यार और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू एक साथ महसूस होगी।

Related post

सूरजपुर हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला: तीन को फांसी ,चौथे को उम्रकैद

सूरजपुर हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला: तीन को…

Spread the loveसूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत…
BREAKING : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अब 12 अक्टूबर को आएंगे रायपुर

BREAKING : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अब 12 अक्टूबर…

Spread the loveरायपुर। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के रायपुर दौरे के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। अब वे 12 अक्टूबर…
31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि

31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान…

Spread the love31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि राजनांदगांव क्षेत्र में 65 हजार से…