• 19/01/2026

बारनावापारा अभयाण्य में “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज….

बारनावापारा अभयाण्य में “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज….
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रायपुर: बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में 16 से 18 जनवरी 2026 तक “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन किया गया। सर्वे के दौरान पक्षियों की अच्छी विविधता देखने को मिली। अब तक प्राप्त डेटा के अनुसार इस सर्वे में लगभग 202 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

इस सर्वे में देश के 11 राज्यों महाराष्ट्र, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल एवं कर्नाटक से आए 70 प्रतिभागियों, 12 वॉलंटियर्स, विशेषज्ञों एवं फोटोग्राफर्स सहित लगभग 100 लोगों की सहभागिता रही।यह बर्ड सर्वे केवल बारनवापारा अभ्यारण्य तक सीमित न होकर उसके आसपास से जुड़े कोठारी, सोनाखान एवं देवपुर परिक्षेत्रों में भी किया जा रहा है। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों द्वारा संग्रहित पक्षी आंकड़े वैश्विक डाटाबेस का हिस्सा बनेंगे।अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होग़ा। सर्वे में प्रमुख विशेषज्ञों में डॉ. हकीमुद्दीन एफ. सैफी, डॉ. जागेश्वर वर्मा, मोहित साहू एवं श्री सोनू अरोरा की सहभागिता रही।

 

*सर्वे के आकर्षण बने प्रमुख प्रजातियां*-इस सर्वे में विशेष रूप से कुछ प्रजातियाँ प्रतिभागियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें बार-हेडेड गूज उल्लेखनीय रही, जो प्रायः मध्य एशिया के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रजनन करती है तथा सर्दियों में भारत सहित दक्षिण एशिया के जलाशयों और खेतों में देखी जाती है। इसी प्रकार आर्द्र घासभूमि, धान के खेतों, दलदली क्षेत्रों एवं नदी किनारे पाए जाने वाले ग्रे-हेडेड लैपविंग, शिकारी पक्षी प्रजाति पेरेग्रिन फाल्कन, ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश, यूरेशियन स्पैरोहॉक,वन पारिस्थितिकी में बीज प्रसार के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन का अवलोकन भी आकर्षण का केंद्र बना।

बर्ड सर्वे के सबंध में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि बारनवापारा सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ मिश्रित एवं साल वनों के साथ विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक परिदृश्य मौजूद हैं। इस सर्वे से प्राप्त डेटा आगे चलकर अभयारण्य में आवश्यक प्रबंधन कार्ययोजनाओं की पहचान में सहायक होगा, खासतौर पर उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण कार्य में जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है।

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