- 22/09/2026
CG : तीन दिन मांस-मटन की बिक्री पर रहेगा प्रतिबंध, विक्रय करते पाए गए तो होगी कड़ी कार्रवाई…..

रायपुर। धार्मिक पर्वों को देखते हुए रायपुर नगर निगम क्षेत्र में तीन निर्धारित तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री और पशुवध पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। नगर निगम ने डोल ग्यारस, अनंत चतुर्दशी और दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व के संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा दिवस पर मांस-मटन की दुकानें और पशुवध गृह बंद रखने का आदेश जारी किया है।
नगर निगम के अनुसार 22 सितंबर को डोल ग्यारस, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी और 26 सितंबर को संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा पर्व मनाया जाएगा। इन अवसरों को देखते हुए निगम क्षेत्र में मांस-मटन के विक्रय और पशुवध पर रोक रहेगी।
होटलों में भी मांस-मटन बेचने पर कार्रवाई
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध सिर्फ खुले बाजार की मांस-मटन दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में भी इन तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री नहीं की जा सकेगी।
महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर निगम प्रशासन ने कहा है कि प्रतिबंधित दिनों में यदि किसी होटल या अन्य प्रतिष्ठान में मांस-मटन की बिक्री होती पाई गई तो संबंधित सामग्री की तत्काल जब्ती की जाएगी और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
पशुवध गृह भी रहेंगे बंद
इन तीनों निर्धारित तिथियों पर नगर निगम क्षेत्र में स्थित पशुवध गृहों को भी बंद रखने का आदेश दिया गया है। निगम प्रशासन ने सभी संबंधित दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को पहले से आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान जारी प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जोन कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग करेंगे निगरानी
आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम के सभी जोन कमिश्नरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मांस-मटन की दुकानों, होटलों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगम प्रशासन इन तिथियों पर पशुवध गृहों और मांस-मटन विक्रय केंद्रों के संचालन पर नजर रखेगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी।
किन तारीखों पर रहेगा प्रतिबंध?
22 सितंबर: डोल ग्यारस
25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी
26 सितंबर: दिगंबर जैन समाज का पर्युषण पर्व — संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा


