• 14/08/2026

चमोली टनल हादसा: छत्तीसगढ़ के दो मजदूर समेत 7 की मौत, 12 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी

चमोली टनल हादसा: छत्तीसगढ़ के दो मजदूर समेत 7 की मौत, 12 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी
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उत्तराखंड। चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन 3 किमी लंबी टनल में गुरुवार शाम लैंडस्लाइड के बाद पानी रिसने लगा। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के मुताबिक मलबा और पानी भरने से अंदर काम कर रहे 22 मजदूर फंस गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक चलता रहा। जिनमें से 19 को अब तक बचा लिया गया है। घायलों का इलाज गोपेश्वर, पिपलकोटी और श्रीनगर के अस्पतालों में चल रहा है।  हादसे में 7 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

मृतकों की सूची

1. प्रदीप पंवार — टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड

2. मुकेश सिंह — चमोली, उत्तराखंड

3. दुर्लभ शर्मा — उत्तर प्रदेश

4. विजय हंसदा — उत्तर प्रदेश

5. जितेंद्र कुमार — उत्तर प्रदेश

6. लोकेश्वर — छत्तीसगढ़

7. भुनेश्वर — छत्तीसगढ़

घायलों की सूची

1. सुनील दीवान — छत्तीसगढ़

2. हरविल गुड़िया — तपरा

3. निस्तर भिंगरा — झारखंड

4. विनोद रावना — झारखंड

5. दीना बेगरा — झारखंड

6. खेला राम बिसरा — झारखंड

7. सुबोग सिंह — पंजाब

8. तिलकराज — हिमाचल प्रदेश

9. चंदन कुमार — रोहतास, बिहार

10. पेन सिंह — छत्तीसगढ़

11. रोहित पांडे — बिहार

12. गोविन्दो मंडल — वेस्ट बंगाल

शाम 7 बजे हादसा, पानी रिसने के साथ लैंडस्लाइड

अधिकारियों के मुताबिक हादसा गुरुवार 13 अगस्त को शाम करीब 7 बजे हुआ। पीपलकोटी के मायापुर में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में पानी का रिसाव और भू-स्खलन हुआ। वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए। टनल के अंदर पानी और मलबा भरने के कारण फंसे मजदूरों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। बचाव दल लगातार अंदर पहुंचकर मजदूरों को बाहर निकालने में जुटे हैं।

रेस्क्यू में सेना और ITBP की टीमें भी लगीं

जिलाधिकारी गौरव कुमारबचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। रात 9 बजे तक 22 पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ के 27, एसडीआरएफ के 42, डीआरएफ के 4 और फायर सर्विस के 9 लोग मौके पर तैनात थे। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें गौचर और जोशीमठ से भी घटनास्थल के लिए रवाना की गईं।

5 साल पहले हुआ था तपोवन टनल हादसा

7 फरवरी 2021 को तपोवन टनल में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। चमोली जिले में आई भीषण बाढ़ ने तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना की सुरंगों को भारी मलबे और पानी से भर दिया था।
ऋषिगंगा नदी के ऊपरी कैचमेंट में एवलांच के बाद पानी और मलबे का सैलाब आया। इससे ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। सैलाब ने NTPC की निर्माणाधीन 520 MW तपोवन-विष्णुगाड हाइड्रोपावर परियोजना को बुरी तरह प्रभावित किया।

सरकारी रिकॉर्ड में कुल 204 लोगों के लापता होने का आंकड़ा दर्ज हुआ। 23 मार्च 2021 तक 80 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे, जिनमें 16 तपोवन टनल से मिले थे। टनल से मिले कुछ शवों की मेडिकल जांच में डूबने के कारण दम घुटना बताया गया; शवों के फेफड़ों और पेट में पानी तथा मलबा मिला था।

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