• 01/07/2025

High Court Decision: छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिकाएं खारिज, बीएड-डीएलएड योग्यता पर फैसला

High Court Decision: छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिकाएं खारिज, बीएड-डीएलएड योग्यता पर फैसला
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छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 1 जुलाई 2025 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए प्राचार्य पदोन्नति आदेश के बाद पोस्टिंग पर लगी रोक हटा दी है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन की प्रमोशन नीति को सही ठहराते हुए इस मामले में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब 3500 स्कूलों में प्राचार्य पोस्टिंग का रास्ता साफ हो गया है।

15 दिन पहले सुरक्षित रखा था फैसला

लगभग 15 दिन पहले जस्टिस रजनी दुबे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को जारी आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से बनाई गई प्रमोशन नीति नियमानुसार है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई।

क्या था मामला?

प्राचार्य पदोन्नति फोरम सहित कई याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इनमें दावा किया गया था कि कोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद कई शिक्षकों को प्राचार्य के पद पर पदोन्नत कर जॉइनिंग दे दी गई, जो न्यायालय की अवमानना का मामला है। हाईकोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में सख्त रुख अपनाते हुए ऐसी सभी जॉइनिंग को आगामी आदेश तक अमान्य कर दिया था।

बीएड की अनिवार्यता और वरिष्ठता का मुद्दा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने प्राचार्य पद के लिए बीएड डिग्री को अनिवार्य बताते हुए अपनी दलीलें पेश कीं। इसके अलावा, माध्यमिक स्कूलों के प्रधान पाठकों से लेक्चरर बने शिक्षकों की वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया गया। यह मामला 2019 से शुरू हुआ था, जबकि 2025 में दायर याचिकाएं बीएड और डीएलएड योग्यता से संबंधित थीं। सुनवाई 11 जून से 16 जून 2025 तक चली, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि प्राचार्य पदोन्नति के लिए बनाए गए नियमों में सभी श्रेणियों के शिक्षकों के हितों का ध्यान रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रमोशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप है। किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी नहीं की गई।

हाईकोर्ट का अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने सभी तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद राज्य सरकार की प्रमोशन नीति को वैध ठहराया और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पोस्टिंग पर लगी रोक को हटाने का आदेश दिया, जिससे प्राचार्य पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया अब सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।

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