- 26/03/2026
रामावतार जग्गी हत्याकांड फिर से खुला, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू

छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हुई हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में फिर से खुल गया है।
बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी भी कोर्ट में मौजूद रहे। कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए **1 अप्रैल 2026** की तारीख तय कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील पर मामले को हाईकोर्ट भेजा
दो साल पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जग्गी हत्याकांड के 28 दोषियों की अपील खारिज कर दी थी और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए पूरा मामला हाईकोर्ट वापस भेज दिया है, ताकि अमित जोगी की बरी होने वाली अपील पर विस्तार से सुनवाई हो सके।
अमित जोगी फिर बने अभियुक्त, जमानत करानी होगी
CBI जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश का आरोप लगा था। 2007 में सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया था। अब केस रिओपन होने के बाद अमित जोगी को फिर से जमानत लेनी पड़ेगी।
अमित जोगी का बयान
अमित जोगी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे अभी जानकारी मिली है कि हाईकोर्ट 1 अप्रैल को सुनवाई करेगा, जिसमें मुझे दो दशक पहले बरी किया जा चुका है। मैं पूर्ण शांति और आत्मविश्वास के साथ कहना चाहता हूं कि ईश्वर की कृपा अब तक मेरे साथ रही है और आगे भी रहेगी। मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, सत्य की जीत निश्चित है।”
क्या था रामावतार जग्गी हत्याकांड?
4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे। CBI जांच में अमित जोगी का नाम भी सामने आया था। ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया, जबकि बाकी 28 आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई। इनमें दो तत्कालीन CSP, एक थाना प्रभारी, याहया ढेबर (पूर्व मेयर एजाज ढेबर के भाई) और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं।
सतीश जग्गी का आरोप है कि हत्या की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी और जांच के दौरान सबूत मिटाए गए थे। उनके वकील बीपी शर्मा ने तर्क दिया था कि ऐसे मामले में सिर्फ सबूतों की कमी से आरोपियों को बरी नहीं किया जा सकता, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है।
कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी कारोबारी पृष्ठभूमि के नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ गए और छत्तीसगढ़ में NCP के कोषाध्यक्ष बने। उनकी हत्या नवंबर 2003 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई थी, जब NCP तेजी से बढ़ रही थी और कांग्रेस सत्ता खोने के डर से घबराई हुई थी।





