• 06/06/2022

Save Hasdeo की आग पहुंची यहां, पर्यावरण संगठनों ने निकाली रैली

Save Hasdeo की आग पहुंची यहां, पर्यावरण संगठनों ने निकाली रैली
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दुर्ग। हसदेव (Hasdeo) अरण्य में पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने का विरोध लगातार बढ़ते ही जा रहा है। हसदेव (Hasdeo) को बचाने के लिए जहां सरगुजा इलाके में अनिश्चितकाली धरना प्रदर्शन चल रहा है। वहीं समूचे छत्तीसगढ़ में पर्यावरण प्रेमी भी जंगल को बचाने के लिए अपना विरोध जता रहे हैं। दुर्ग में सोमवार को हसदेव (Hasdeo) जंगल में पेड़ों की कटाई बंद कर इसे बचाने की मांग को लेकर जिले के पर्यावरण संगठनों ने आज शहर में बाइक रैली निकाली। इस बाइक रैली में बड़ी संख्या में शहर सहित आसपास ग्रामों के पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए जिन्होंने पेड़ों की कटाई बंद कर हसदेव बचाने के नारे लगाते हुए शहर का भ्रमण किया।

जिले के पर्यावरण संगठनों आदर्श युवक मंडल पोटिया,हरित क्रांति संगठन कोड़िया, हितवा संगवारी डुन्डेरा, पीपुल फार एनीमल भिलाई, सृजनशील युवा एवं महिला मंडल पिसेगांव, एनवायरमेंट हीरोज अछोटी,गायत्री परिवार दुर्ग, पर्यावरण मित्र समिति रिसाली सहित विभिन्न संगठनों एवं पर्यावरण प्रेमी सबसे पहले पुराना बस स्टैंड दुर्ग के पास एकत्रित हुए। जहां से हसदेव बचाने बाइक रैली निकाली जो गांधी चौक,नया बस स्टैंड, राजेंद्र पार्क,ग्रीन चौक, अग्रसेन चौक, फरिश्ता कंपलेक्स, इंदिरा मार्केट होते हुए वापस पुराना बस स्टैंड में आकर समाप्त हुआ।

इस दौरान रैली में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ता अपने हाथों में हसदेव बचाने से संबंधित स्लोगन लिखी हुई तख्तियां लेकर चल रहे थे। रैली के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने लोगों को बताया कि हसदेव (Hasdeo) का जंगल मध्य भारत का फेफड़ा कहा जाता है, जहां के जंगलों में लगे पेड़ों कोयला खनन के नाम पर काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जंगल जैव विविधता से भरा हुआ है यहां के पेड़ों को काटकर कोयला उत्खनन किए जाने से कई वर्षों से कायम जैव विविधता खत्म हो जाएगी। साथ ही इसका पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा पेड़ों की कटाई की वजह से पहले ही पर्यावरण प्रदूषण समस्या बनी हुई है।

यदि जंगल को काटा जाता है तो पर्यावरण पर इसका असर होने के साथ-साथ यहां रहने वाले आदिवासियों की आजीविका एवं जंगल में रहने वाले वन्य प्राणी तथा जीव जंतु भी प्रभावित होगी। उन्होंने लोगों से अपील किया कि सबकी जागरूकता से ही हसदेव की जंगल को बचाया जा सकता है इसलिए सभी व्यक्तिगत स्तर पर पत्र लिखकर हसदेव बचाने मुहिम चलाएं। साथ ही उन्होंने सौर ऊर्जा के ज्यादा से ज्यादा उपयोग के लिए अनुसंधान किए जाने की भी मांग सरकार से की ताकि कोयला का उपयोग कर बिजली उत्पादन की निर्भरता को कम किया जा सके।

बंद का नहीं हुआ असर

पर्यावरण संगठनों ने हसदेव जंगल में पेड़ों की कटाई के विरोध में आज दुर्ग शहर बंद का आह्नान किया था। मगर शहर की सभी दुकानें सामान्य दिनों की तरह ही खुली रही इसके बावजूद भी इस दौरान आयोजित बाइक रैली में लोगों ने बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी देकर हसदेव बचाने अपनी आवाज बुलंद की।

इसे भी पढ़ें : हसदेव अरण्य में जंगल कटाई और कोल खनन का विरोध करने वालों को सीएम भूपेश का जवाब – पहले अपने घर की बिजली बंद करो.. फिर लड़ो

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