• 26/06/2025

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मुस्लिम महिलाओं को ‘खुला’ के लिए पति की सहमति जरूरी नहीं

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मुस्लिम महिलाओं को ‘खुला’ के लिए पति की सहमति जरूरी नहीं
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के तलाक (खुला) के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मुस्लिम महिला को ‘खुला’ के जरिए अपने पति से तलाक लेने के लिए उसकी सहमति या मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। यह अधिकार पूर्ण और स्वतंत्र है, जिसके तहत एक मुस्लिम महिला एकतरफा तरीके से विवाह समाप्त कर सकती है।

खुलाके लिए मुफ्ती या दारउलकजा की जरूरत नहीं
जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि ‘खुला’ के लिए मुफ्ती या दार-उल-कजा से ‘खुलानामा’ प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनकी भूमिका केवल सलाहकारी होती है, न कि निर्णायक। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट का काम केवल यह सुनिश्चित करना है कि ‘खुला’ का अनुरोध वैध है, क्या समझौते की कोशिश हुई थी, और क्या महिला ने मेहर (दहेज) वापस करने की पेशकश की है। इस प्रक्रिया को संक्षिप्त और बिना लंबी सुनवाई के पूरा किया जाना चाहिए।

कुरान का हवाला, इस्लामी कानून का समर्थन
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कुरान की आयत 228 और 229 (चैप्टर-II) का हवाला देते हुए कहा कि इस्लामी कानून मुस्लिम महिलाओं को विवाह समाप्त करने का पूर्ण अधिकार देता है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस्लामी ग्रंथों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि ‘खुला’ के लिए पति की सहमति अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसका काम केवल ‘खुला’ की प्रक्रिया पर न्यायिक मुहर लगाना है, ताकि यह दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी हो।

क्या था मामला?
यह फैसला एक मुस्लिम व्यक्ति की अपील पर आया, जिसकी पत्नी ने ‘सदा-ए-हक शरई काउंसिल’ नामक एनजीओ के माध्यम से ‘खुला’ लिया था। पति ने इस तलाक को फैमिली कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी के ‘खुला’ के अधिकार को और मजबूती प्रदान की।

महिलाओं के लिए सशक्तिकरण की दिशा में कदम
इस फैसले को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल महिलाओं को स्वतंत्र रूप से तलाक लेने का अधिकार देता है, बल्कि इस प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने पर भी जोर देता है।

 

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