• 03/02/2023

रामचरित मानस विवाद में CM भूपेश की एंट्री, बढ़ेगा सियासी पारा? बोले- जैसा लिखा है वैसा स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं

रामचरित मानस विवाद में CM भूपेश की एंट्री, बढ़ेगा सियासी पारा? बोले- जैसा लिखा है वैसा स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं
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राम चरित मानस विवाद में अब छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल की भी एंट्री हो गई है। भूपेश बघेल ने कहा कि धर्म ग्रंथ में जैसा लिखा है उसको वैसा स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है। उसमें जो चीजें अच्छी हैं उसे ग्रहण कीजिए। इसके साथ ही उन्होंने इस विवाद को सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या और योगी आदित्यनाथ के लिए फायदेमंद बताया है। उन्होंने कहा कि विवाद दोनों को सूट कर रहा है, दोनों के वोट के लिए बहुत बढ़िया और इसमें जनता जबरदस्ती का पिस्ती है, जो मूल मुद्दा है उससे हट जाते हैं।

भूपेश बघेल ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसी भी धर्म ग्रंथ का या दर्शन का आज की परिस्थिति में गूढ़ विवेचना करना चाहिए और सूक्ष्म से सूक्ष्म तत्व को भी विचार करना चाहिए। उसको जस की तस ग्रहण नहीं करना चाहिए। वो जैसी लिखी है आज की परिस्थिति में उसको वैसा ही स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है। बघेल ने कहा कि जो रामायण में जो अच्छी चीजें हैं उसे ग्रहण कर लीजिए। ये छोटे-छोटे चीजों में विवाद करके आप वोट की राजनीति कर रहे हैं इसके अलावा कुछ नहीं।

भूपेश बघेल ने विनोबा भावे के कथन का जिक्र करते हुए बोले, “किसी भी धर्म ग्रंथ के या किसी भी दर्शन के किसी समय लिखा गया है तो आज के समय में आज की परिस्थिति में उसका गूढ़ विवेचना करना चाहिए। उसके तत्व को सार तत्व को सूक्ष्म से सूक्ष्म तत्व को भी विचार करके ग्रहण करना चाहिए, जस के तस ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं है।”

बघेल ने आगे कहा, “साढ़े 600 साल पहले रामायण लिखा गया, बाल्मीकि रामायण उससे भी पहले लिखा गया, देश में अनेक प्रदेश हैं जहां रामायण की कितनी ही भाषा में रचना हुई है। वह जैसी लिखी है उसी प्रकार से आपको आज की परिस्थिति में स्वीकार्य करने की जरूरत नहीं है। जो उसके मूल तत्व हैं उसकी विवेचना करिए और उसके सूक्ष्म तत्व को ग्रहण करिए। जो आज आपके लिए जरूरी है।

बघेल ने आगे कहा, ” यह जो वाद-विवाद कर रहे हैं वह गलत है। रामायण में जो अच्छी चीज है उसको ग्रहण कर लीजिए ना। उसमें जो आपको नहीं जमता उसको छोड़ दीजिए। लेकिन इसके अलावा भी बहुत सारी चीजें हैं, एक चौपाई एक दोहा 2-4 दोहे से फर्क नहीं पड़ता इतने बड़े ग्रंथ में। महाभारत लिखा गया है, वेद लिखा गया है, उपनिषद लिखा गया है, गीता है उसमें जो मूल तत्व है उसको ग्रहण कीजिए ना। आज की परिस्थिति में हर के लिए हर बात सही नहीं हो सकती।”

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