• 04/08/2022

रिसर्च में खुलासा : ज्यादा पीते हैं ये ड्रिंक तो हो सकता है मोतियाबिंद का खतरा

रिसर्च में खुलासा : ज्यादा पीते हैं ये ड्रिंक तो हो सकता है मोतियाबिंद का खतरा

द तथ्य । सुबह-सवेरे गरमा-गरम चाय या कॉफी पीना भला किसे पसंद नहीं होगा। अधिकांश लोग सुबह चाय या कॉफी लेना ही पसंद करते हैं। लेकिन यदि यह कहा जाए कि ज्यादा कॉफी पीना आंखों की रौशनी के लिए खतरा है तो! जी हां… एक रिसर्च के अनुसार यह संभव है कि अत्यधिक कॉफी पीना आपकी आंखों के लिए बेहद नुकसानदेह है। कॉफी के ज्यादा सेवन से मोतियाबिंद जैसी बीमारी भी हो सकती है। दुनियाभर में कॉफी को एक पसंदीदा पेय पदार्थ के रूप में स्वीकारा जाता है। देश हो या विदेश, हर जगह लोग सुबह उठकर कॉफी पीना ही पसंद करते हैं। लेकिन अब रिसर्च के अनुसार ज्यादा कॉफी सीधे-सीधे हमारी आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं।

स्टेटिस्टा रिसर्च डिपार्टमेंट की ओर से की गई रिसर्च के अनुसार वर्ष 2022 के दौरान पूरे भारत में कॉफी की खपत 1210 हजार 60 किलोग्राम थी। जबकि वर्ष 2021 में कॉफी की वैश्विक खपत लगभग 165 मिलियन 60 किलोग्राम बैग थी। जिसमें कॉफी की सबसे ज्यादा खपत यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी। रिसर्च के अनुसार, कॉफी के सेवन से कुछ गंभीर बीमारियां जैसे- टाइप 2 डायबिटीज, फैटी लिवर डिसीज और कुछ कैंसर में मदद मिल सकती है, लेकिन आपको यह नहीं मालुम कि ज्यादा कॉफी पीने से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

बढ़ सकता है बीपी :
के अनुसार, अधिक कॉफी पीने से ग्लूकोमा यानी मोतियाबिंद हो सकता है। यह सामान्य आंख की स्थिति है। लेकिन अगर इसका जल्दी और ठीक से इलाज नहीं किया गया तो आंखों से दिखना भी बंद हो जाता है। एक्सपर्ट का कहना है कि कॉफी में काफी मात्रा में कैफीन होता है। इसलिए दिन में एक या दो कप से ज्यादा कॉफी नहीं पीना चाहिए। यदि कोई प्रतिदिन तय मात्रा से अधिक कॉफी पीता है तो उसे मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है।

कैफीनयुक्त ड्रिंक से ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है इससे आंखों में दबाव भी बढ़ जाता है। वहीं अगर किसी की आंखों में लगातार दबाव पड़ता है तो मोतियाबिंद हो सकता है। मोतियाबिंद दुनिया में सबसे अधिक अंधेपन का कारण माना जाता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिसर्च के अनुसार तीन से अधिक कप कॉफी पीने से एक्सफोलिएशन ग्लूकोमा का खतरा काफी बढ़ जाता है। मोतियाबिंद तब होता है जब शरीर में लिक्विड का निर्माण होता है और उससे आंखें ऑप्टिक नसों पर दबाव बढ़ा देती हैं, लेकिन जरुरी नहीं कि कॉफी के ज्यादा सेवन से मोतियाबिंद ही होगा। रिसर्च में जिन लोगों को शामिल गया था उन सभी की ग्लूकोमा की पारिवारिक हिस्ट्री थी। अगर आप कभी कभार अधिक कॉफी पी लेते हैं या हफ्ते में एक दिन ऐसा हो तो उसे इस रिसर्च में शामिल नहीं किया गया था। रिसर्च में ऐसे लोगों को ही शामिल किया गया था जो प्रतिदिन तीन या उससे ज्यादा कप कॉफी पीते हैं।

दिन में कितनी हो कॉफी की मात्रा-हेल्थ लाईन की माने तो कॉफी में कैफीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। यानी कि कभी एक कप कॉफी में 50एमजी कैफीन तो कभी 400एमजी कैफीन हो सकती है। सामान्य कॉफी के कप में औसतन 100एमजी कैफीन होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार एक दिन में तकरीबन 400 मिलीग्राम कैफीन लेना 4 कप चाय पीने के बराबर होता है। सीमित मात्रा में कैफीन पीना स्वास्थ्य के लिए लाभकारक है। यह आंखों के लिए भी बेहतर है और यह कई बीमारियों के चपेट में आने के खतरे को भी कम करता है। कच्ची कॉफी के बीन्स में क्लोरोजेनिक एसिड सीजीए होता है। जिसे एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। जो कि ब्लडप्रेशर और ब्लड सर्कुलेशन कम करने में मदद करता है।

ऐसे होता है मोतियाबिंद :
ग्लूकोमा सामान्यत तौर पर ऐसी स्थिति है जो बड़ों और वृद्धों को प्रभावित कर सकता है। यह काफी धीरे-धीरे विकसित होता है। पहले आपकी रोशनी धुंधली होती है और फिर धीरे-धीरे अन्य लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस वजह से लोगों को पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें ग्लूकोमा है। इस बात का पता तभी चलता है जब आंखों की नियमित जांच कराई जाए।

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