• 15/06/2022

अग्निपथ पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, मरकाम ने कहा- क्या मोदी सरकार सेना को भी ठेका प्रथा से चलाएगी

अग्निपथ पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, मरकाम ने कहा- क्या मोदी सरकार सेना को भी ठेका प्रथा से चलाएगी

रायपुर। सेना में भर्ती के लिए केन्द्र सरकार की अग्निपथ योजना का विरोध शुरू हो गया है। अब कांग्रेस ने भी योजना पर सवाल उठाया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने मोदी सरकार पर सेना को ठेका प्रथा से चलाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने युवाओं के भविष्य को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।

मरकाम ने कहा कि सैन्य विशेषज्ञों और तीनो सेनाओ के उच्चतम अधिकारियो व रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने मोदी सरकार की इस पूरी स्कीम पर गहन चिंता जताई है। एक से अधिक सैन्य अधिकारियो व विशेषज्ञों ने कहा है कि मोदी सरकार का यह फैसला भारतीय सेनाओ की गरिमा, परंपरा, जुड़ाव की भावना व अनुशासन की परिपाटी के साथ खिलवाड़ है। रक्षा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि 4 साल की कॉन्टैंक्ट भर्ती देश की सुरक्षा के लिए उचित संदेश नहीं। यह निर्णय कहीं न कहीं तीनों  सेनाओं की कार्यक्षमता, निपुणता, योग्यता, प्रभावशीलता व सामर्थ्य पर समझौता करने वाला है। सबसे चिंता का विषय है कि चार साल के बाद इन युवा सैनिकों के भविष्य का क्या होगा? यह सब तब किया जा रहा है, जब भारत के दो एक्टिव बॉर्डर है तथा देश पाकिस्तान व चीन के साथ जुड़ी सीमा पर लगातार संघर्षरत है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि मोदी सरकार बताये तीनों सेनाओं में 2,55,000 से अधिक पद खाली क्यों पड़े हैं। मोदी सरकार ने 2 साल से सेनाओं की भर्ती क्यों रोक रखी है ?‘अग्निवीर स्कीम’ से तीनों सेनाओं में हर साल 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत कम यह स्कीम केवल तनख्वाह, पेंशन, हैल्थ बेनेफिट्स व कैंटीन सेवाओं आदि में कटौती करने के लक्ष्य से बनाई गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भारत की तीनों सेनाओं की एक विशेष गरिमा, इतिहास, चरित्र व अनुशासन की परिपाटी है। सेना में सबसे बड़ा एस्सेट सैनिक है, जो ‘यूनिट’ के जुड़ाव के आधार पर लड़ता है और देश की रक्षा करता है। सैनिक के बलिदान की भावना, जिसे ‘‘नाम’’, ‘‘नमक’’ व ‘‘निशान’’ से जाना जाता है, वह सालों के जुड़ाव से पैदा होता है। एक अनुशासित कमान में हर कुर्बानी देने वाली फौज के लिए परंपराओं का यह जुड़ाव उन्हें एक परिवार बनाता है, तथा उस मार्ग पर चलकर वह देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानी करने को सदैव तत्पर रहते हैं। क्या चार साल के कॉन्टैंक्ट भर्ती के सैनिक इस परंपरा, परिपाटी, जुड़ाव व अनुशासन की भावना अपना पाएंगे? क्या इतने थोड़े समय में यह संभव हो पाएगा?  चार साल की सेना भर्ती योजना किसने बनाई? क्या इसे बनाने से पहले देश की सैन्य व सुरक्षा जरूरतों बारे उपयुक्त समीक्षा हुई? क्या यह सुझाव थल सेना, वायु सेना या नौसेना से आया?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि नौसेना व वायुसेना के ज्यादातर पद टेक्निकल हैं व उन्हें एक स्पेशलिस्ट काडर की जरूरत है। इस स्पेशलिस्ट काडर में टेंनिंग की अवधि ही 1.5 से 2 साल है तथा कुछ समय एडवांस ईक्विपमेंट्स को जानने व समझने में भी लगता है। ऐसे में ट्रेनिंग कैसे देंगे और चार साल बाद इन ट्रेनिंग किए गए लोगों को छोड़ेंगे कैसे?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चार साल के बाद इन युवाओं के भविष्य का क्या होगा? चार साल के बाद 22 से 25 साल की उम्र में बगैर किसी अतिरिक्त योग्यता के ये युवा अपने भविष्य का निर्माण कैसे करेंगे? क्या यह सही नहीं कि 15 साल की सेवा के बाद जब रैग्युलर सैनिक भी वापस घर लौटता है, तो उसे अधिकतर समय केवल बैंक में गार्ड या सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी ही मिल पाती है? तो ऐसे में चार साल की कॉन्टैंक्ट सेवा के बाद यह 23 से 25 साल का युवा क्या कर सकेगा? क्या उसकी जिंदगी प्रश्नचिन्ह में तो नहीं चली जाएगी और क्या वह रोजी-रोटी तथा अच्छी जिंदगी की तलाश में कहीं किसी गलत मार्ग की तरफ तो आकर्षित नहीं हो जाएगा? क्या मोदी सरकार इन चिंताओं और संभावनाओं का जवाब देगी?

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