• 13/07/2022

पवित्र सावन माह कल से ऐसे करें महादेव को प्रसन्न…

पवित्र सावन माह कल से ऐसे करें महादेव को प्रसन्न…
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रायपुर। देवों के देव महादेव के प्रिय श्रावण मास कल से प्रारंभ हो रहा है। शिवभक्तों को श्रावण मास का बेसब्री से इंतजार होता है, क्योंकि यही वो समय है जब इस माह में लगातार कोई न कोई व्रत, पर्व या शुभ तिथि बनती है। शहर के शिवालय सावन पूजा के लिए सजकर तैयार हो चुका है। अब शिवालयों में कल से पूरे माह भर बम-बम भोले की गूंज रहेगी।

इस वर्ष पवित्र श्रावण मास कल 14 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है और 11 अगस्त को समाप्त होगा। इस दौरान सावन माह के चार सोमवार, दो प्रदोष भी रहेगा। इन तिथियों में भगवान आशुतोष की विशेष पूजा-पाठ व आराधना का पूरा फल मिलता है। वहीं, देवशयनी एकादशी प्रारंभ हो जाने के कारण अब अगले चार माह तक विवाह आदि नहीं होंगे, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, पूजा-पाठ आदि अनवरत जारी रहेगा। इस वर्ष श्रावण मास में प्रत्येक दूसरे-तीसरे दिन कोई न कोई पर्व, व्रत या शुभ तिथि रहेगी।

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जानकारों की माने तो कि देवशयनी एकादशी से अगले चार महीने तक विवाह और अन्य शुभ काम नहीं होते हैं। इसकी वजह बताते हुए शास्त्रों के कहा गया है कि भगवान विष्णु आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी से चार महीने तक क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं, इसीलिए श्रावण मास मंे शिवपूजन का विशेष महत्व रहता है। इधर शहर के शिवालयों में सावन पूजा की विशेष तैयारियां हो चुकी हैं। शहर के बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर के साही खारून नदी स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर, बंजारेश्वर महादेव मंदिर, नरहरेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में आकर्षक साज-सज्जा का काम हो चुका है। कल से कांवड़ियों का जत्था भी शिवालयों में बम-भोले के जयकारा लगाते हुए जलाभिषेक के लिए रवाना होंगे। अब पूरे सावन माह के दौरान शिवभक्त शिवालयों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का विविध तरीके से अभिषेक करेंगे।

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कोई विशेष पूजन विधि नहीं:

देवों के देव महादेव को प्रसन्न करना काफी सरल कार्य होता है। अन्य देवी-देवताओं के पूजन का विधान निश्चित होता है। लेकिन महादेव ही केवल एक ऐसे देव हैं जिनकी कोई पूजन विधि नहीं हैं। महादेव एक साधारण बेल पत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। महादेव को भांग, धतूरा, आक, कनेर विशेष रूप से प्रिय हैं। भगवान भोलेनाथ की पूजा केवल शुद्ध जल चढ़ाने से भी हो जाती है और तरह-तरह के अभिषेक से भी हो जाती है। श्रद्धालु जिस तरह से चाहें वो भोलेनाथ की पूजा कर सकते हैं, इसीलिए कहा गया है कि अन्य देवों को प्रसन्न करना आसान नहीं हैं, मगर महादेव को प्रसन्न करना काफी सरल है।

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