• 04/05/2025

भारत की PAK पर एक और वाटर स्ट्राइक ,बगलिहार डैम से रोका चिनाब नदी का पानी, प्यासा मरेगा पाकिस्तान

भारत की PAK पर एक और वाटर स्ट्राइक ,बगलिहार डैम से रोका चिनाब नदी का पानी, प्यासा मरेगा पाकिस्तान
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भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक और सख्त कदम उठाते हुए चिनाब नदी के पानी को बगलिहार डैम से रोक दिया है। यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के बाद की गई है। अब भारत ने जम्मू के रामबन जिले में स्थित बगलिहार डैम से पानी की रिहाई को पूरी तरह रोक दिया है और जल्द ही उत्तरी कश्मीर में किशनगंगा डैम पर भी इसी तरह की कार्रवाई की योजना है।

पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव

पिछले महीने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या कर दी थी। हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इस संधि के तहत चिनाब, झेलम और सिंधु जैसी पश्चिमी नदियों का 80% पानी पाकिस्तान को मिलता है, जो उसकी कृषि और जलविद्युत के लिए बेहद जरूरी है। भारत ने अब इन नदियों के पानी को नियंत्रित करने का फैसला किया है, जिसे पाकिस्तान ने ‘युद्ध की घोषणा’ करार दिया है। पाकिस्तान नेताओं के भड़काऊ बयान सामने आ रहे थे, जिसमें न्यूक्लियर अटैक तक की धमकी दी जा रही थी।

बगलिहार डैम से पानी रोकने का असर

बगलिहार डैम, जो चिनाब नदी पर एक रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है, पहले भी भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र रहा है। पाकिस्तान ने इस डैम के डिजाइन पर आपत्ति जताते हुए विश्व बैंक में शिकायत की थी। अब पानी रोकने की इस कार्रवाई से पाकिस्तान के पंजाब के खेतों पर गंभीर असर पड़ सकता है, जहां चिनाब का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास अभी बड़े पैमाने पर पानी रोकने की बुनियादी संरचना नहीं है, लेकिन मौजूदा डैमों से पानी की मात्रा और समय को नियंत्रित कर वह पाकिस्तान को नुकसान पहुंचा सकता है।

पाकिस्तान की गीदड़ भभकी

पाकिस्तान ने इस कदम को लेकर कड़ा विरोध जताया है। पूर्व मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा था, “अगर भारत ने सिंधु का पानी रोका तो नदी में पानी की जगह खून बहेगा।” वहीं, पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पानी की कमी से उनकी कृषि और अर्थव्यवस्था पर भारी संकट आ सकता है। दूसरी ओर, भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अल्पकालिक तौर पर ही प्रभावी हो सकता है, क्योंकि भारत के पास अभी बड़े भंडारण डैम नहीं हैं। हिमांशु ठक्कर, जो साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर एंड पीपल के विशेषज्ञ हैं, ने कहा, “पानी रोकना तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की जरूरत है, जिसमें सालों लग सकते हैं।”

भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों पर नए डैम और भंडारण परियोजनाओं को तेजी से पूरा करेगी। जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर पाकल दुल, रातले और किरु जैसे प्रोजेक्ट्स पहले से निर्माणाधीन हैं। सरकार का दावा है कि इनसे न केवल पानी का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि उत्तरी भारत में पानी की कमी को भी दूर किया जा सकेगा। हालांकि, पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि हिमालयी क्षेत्र में बड़े डैम बनाने से भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

 

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