• 16/01/2024

औकात के बाद अब चूजे.. नहीं रुक रही अफसरों की बदजुबानी, अब तहसीलदार के खिलाफ CM ने लिया सख्त एक्शन

औकात के बाद अब चूजे.. नहीं रुक रही अफसरों की बदजुबानी, अब तहसीलदार के खिलाफ CM ने लिया सख्त एक्शन
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मध्य प्रदेश में अफसरों की बदजुबानी रुकने का नाम नहीं ले रही है। शाजापुर में ड्राइवर से औकात पूछने वाले कलेक्टर के बाद अब देवास में महिला तहसीलदार द्वारा किसानों से अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। अधिकारियों की बदजुबानी पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी एक्शन लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं। शाजापुर कलेक्टर के बाद अब देवास की महिला तहसीलदार पर गाज गिरी है।

मामला देवास जिले के कुमारिया राव गांव का है। यहां खड़ी फसल के बीच खेतों में बिजली के खंभे लगाने को लेकर तहसीलदार से किसानों की कहासुनी हो गई। इस दौरान एक किसान के बेटे ने अंग्रेजी में कह दिया कि यू आर रिस्पॉन्सिबल। यह शब्द सुनते ही महिला तहसीलदार अंजली गुप्ता किसानों पर जमकर भड़क गई। तहसीलदार ने कहा, ”चूजे हैं ये, अंडे से निकले नहीं, बड़ी-बड़ी मरने-मारने की बात करते हैं। मैं अभी तक आराम से बात कर रही थी लेकिन आज इसने कैसे बोल दिया मैं कैसे जिम्मेदार हूं?”

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सीएम मोहन यादव ने संज्ञान लिया। जिसके बाद रातों रात तहसीलदार साहिबा का तबादला कर दिया गया। तहसीलदार अंजली गुप्ता को कलेक्टर ने जिला मुख्यालय के निर्वाचन कार्यालय में अटैच कर दिया है।

इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान आया है। जिसमें उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की अभद्र भाषा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेरे निर्देश के बाद कलेक्टर ने तहसीलदार को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। सुशासन ही मेरी सरकार का मूल मंत्र है।’’

ड्राइवर से ‘औकात’ पूछने वाले कलेक्टर पर एक्शन

आपको बता दें इससे पहले शाजापुर कलेक्टर ड्राइवर यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग के दौरान आपा खो दिया था। यूनियन के एक प्रतिनिधि ने कलेक्टर से ठीक ढंग से बातचीत करने का आग्रह किया तो उऩ्होंने कहा कि क्या करोगे तुम, क्या औकात है तुम्हारी?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत एक्शन लेते हुए शाजापुर कलेक्टर किशोर कन्याल को हटा  दिया था। इस मामले में सीएम ने कहा था, “यह सरकार गरीबों की सरकार है। सबके काम का सम्मान होना चाहिए और भाव का भी सम्मान होना चाहिए। साथ ही हिदायत दी थी कि मनुष्यता के नाते ऐसी भाषा हमारी सरकार में बर्दाश्त नहीं। मैं खुद मजदूर परिवार का बेटा हूं। इस तरह की भाषा बोलना उचित नहीं है। अधिकारी भाषा और व्यवहार का ध्यान रखें।”

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