• 17/07/2022

नागरिकों में बूस्टर डोज लगवाने उत्साह नहीं, आगे बढ़ न जाए मुसीबत

नागरिकों में बूस्टर डोज लगवाने उत्साह नहीं, आगे बढ़ न जाए मुसीबत

द तथ्य डेस्क । कोरोना के बूस्टर डोज लगवाने नागरिकों में उत्साह नजर नहीं आ रहा है, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कोरोना के प्रथम व द्वितीय डोज की तरह ही बूस्टर डोज लगवाना भी अनिवार्य है। पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेने वाला कोविड-19 को पछाड़ने में भारत पूरी ताकत से जुटा है, लेकिन अभी भी देश में कोरोना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब कोरोना के नए वैरियंट ने एक बार फिर से लोगों को डराना शुरू कर दिया है। बूस्टर डोज लगवाने में नागरिक ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे हैं, इससे आगे चलकर फिर से परेशानी हो सकती है।

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भारत में कोरोना वैक्सीन की अब तक दी गई टीकों की संख्या 200 करोड़ पार हो चुका है। देश ने 546 दिन में यह लक्ष्य हासिल किया है। जबकि 100 करोड़ टीके का लक्ष्य 277 दिन में पूरा हो गया था। अगस्त 2021 में एक ही दिन में 1 करोड़ डोज लगाया गया था वहीं 17 सितंबर 2021 को ही एक दिन में सबसे ज्यादा 2.5 करोड़ डोज लगाने का रिकार्ड बना हुआ है। दूसरी ओर भारत में फिर से कोरोना अपना पैर पसार रहा है। वहीं लोग टीका को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रहे हैं जो कि चिंता की बात है।

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बूस्टर डोज लगवाने के लिए नागरिकों में पहले जैसी उत्साह नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि अब तक कोरोना बूस्टर के केवल 5.62 करोड़ टीके ही लग पाए है। जबकि विश्व के कई देश ऐसे हैं जहां नागरिकों को चौथी डोज लगाई जा रही है। टीकाकरण के मामले में अब भारत पिछड़ता जा रहा है जो आने वाले दिनों में मुसीबत का सबब बन सकता है।
कोरोनाकाल में वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। देश में 16 जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन का काम शुरू हुआ था। इस तरह 24 फरवरी 2021 तक 1 करोड़ डोज लगाया जा चुका था। 29 अपै्रल 21 को यह आंकड़ा बढ़कर 15 करोड़ हो गया था। इसी तरह 3 जून को 25 करोड़, 7 अगस्त को 50 करोड़, 14 सितंबर को 75 करोड़ 21 अक्टूबर को 100 करोड़, 7 जनवरी को 150 करोड़ तथा 19 फरवरी तक यह आंकड़ा बढ़कर 175 करोड़ हो गया था।

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बूस्टर डोज के प्रति उदासीनता का कहीं ये कारण तो नहीं:
कोरोनाकाल में वैक्सीनेशन के लिए पहले 9 माह के अंतराल का नियम लागू किया गया था। फिर इसे घटाकर 6 माह किया गया। पुराने नियम को ही मानें तो अब तक केवल 5 प्रतिशत नागरिकों को ही बूस्टर डोज लग पाया है। 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिकों के लिए 10 अप्रेल से टीकाकरण शुरू किया गया था। इसे भी निजी टीकाकरण केन्द्रों में शुल्क के साथ लगाया जा रहा था। पहले कोविशील्ड की बूस्टर डोज की कीमत 780 रूपए रखी गई और कोवैक्सीन की कीमत 1410 रूपए थी। इसके अलावा वैक्सीन को लेकर लोगों के बीच भ्रामक सूचनाओं का आदान-प्रदान, अफवाह आदि भी ऐसे कारण हो सकते हैं जिसके चलते लोग बूस्टर डोज के प्रति

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