• 22/03/2024

एक ऐसा शापित गांव, जहां होली पर पसर जाता है सन्नाटा..400 साल से नहीं हुआ होलिका दहन

एक ऐसा शापित गांव, जहां होली पर पसर जाता है सन्नाटा..400 साल से नहीं हुआ होलिका दहन
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हमारे देश भी आज भी कई ऐसी मान्यताएं हैं जिसके पीछे का रहस्य सुलझ नहीं पाया है. एक ऐसी ही रोचक परंपरा होलिका दहन से जुड़ी है, जिसके बारे में आपने नहीं सुना होगा. बुंदेलखंड में एक ऐसा गांव है जहां देवी के प्रकोप के चलते होलिका दहन नहीं किया जाता. एक बार गांव के लोगों ने इस परंपरा को तोड़कर होलिका दहन किया था, जिसके बाद गांव पर भयानक संकट आ गया था.

400 साल पुरानी परंपरा 

सागर जिले के आदिवासी गांव हथखोह में होलिका दहन नहीं मनाया जाता है. हथखोह में होलिका दहन पर एक अंजान खौफ लोगों के दिलोदिमाग पर छा जाता है. ये परंपरा आज की नहीं, करीब 400 साल पुरानी है. लोग बताते हैं कि गांव में झारखंडन माता का मंदिर है और ऐसा कहा जाता है कि अगर गांव में होली जलाते हैं, तो माता नाराज हो जाती हैं.

होली के दिन होती है दहशत 

सागर के नेशनल हाइवे-44 के करीब घने जंगलों में बसा हथखोह गांव एक तरह से आदिवासी बाहुल्य गांव है. यहां हथखोह में आदिवासी और लोधी समाज की जनसंख्या ज्यादा है. इस गांव में वैसे तो सभी तीज त्यौहार मनाए जाते हैं. लेकिन होली के त्यौहार के पहले से ही इस गांव के लोगों को एक अंजानी दहशत घर कर लेती है. जहां हर दूसरे गांवों में लोग होलिका दहन की तैयारियों में लगे रहते हैं, वहीं हथखोह गांव में एक अजीब सा सन्नाटा पसर जाता है.

ग्रामीण यहां अगले दिन रंग तो खेलते हैं पर होलिका दहन से डरते हैं. इस गांव में घने जंगल के बीच झारखंडन माता का मंदिर है. मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां देवी स्वयं प्रकट हुई थीं और जंगल के बीचोंबीच इनकी एक छोटी सी मूर्ति थी. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि गांव के एक बुजुर्ग को सपने में पता चला था कि गांव के पास घने जंगलों में माता विराजी है.

जंगल के मिली मूर्ति 

जब गांव के लोगों ने जब तलाश की, तो एक माता की एक मूर्ति जंगल के बीच मिली और उन्होंने पूजा अर्चना शुरू कर दी. धीरे-धीरे गांव के सभी लोग माता की पूजा अर्चना में लग गए और एक छोटा सा मंदिर बनवाया. कुछ ही दिनों में माता के मंदिर की महिमा की चर्चा गांव के बाहर होने लगी और लोग बाहर से दर्शन के लिए आने लगे.

पुजारी का कहना है कि सालों पहले एक बार कुछ लोगों ने जिद करते हुए गांव में होलिका दहन का फैसला लिया और दूसरी जगह की तरह गांव में होली जलाई, लेकिन दहन के कुछ देर बाद ही पूरे गांव में भीषण आग लग गई और आग ने पूरे गांव को चपेट में ले लिया.

होलिका दहन न करने की शपथ 

इसके बाद से गांव के लोगों ने इसे माता का शाप माना और मंदिर पहुंचकर झारखंडन माता से माफी मांगी और फिर कभी होलिका दहन ना करने की कसम ली. यही वजह है कि तभी से इस गांव में होलिका दहन के बारे में सोचते भी नहीं है.

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