• 24/07/2022

कर्मचारियों-शिक्षकों के हड़ताल को लेकर माओवादियों ने जारी किया पत्र, लिखी ये बातें…

कर्मचारियों-शिक्षकों के हड़ताल को लेकर माओवादियों ने जारी किया पत्र, लिखी ये बातें…

द तथ्य डेस्क।  अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के संयुक्त बैनरतले कल प्रदेश भर के कर्मचारी अधिकारी कलमबंद-कामबंद हड़ताल में शामिल होने वाले हैं। इसके ठीक पहले माओवादियों ने एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने हड़ताल का पुरजोर समर्थन की बात कहते हुए इसे अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील करने का आव्हान कर रहे हैं। यही नहीं माओवादियों ने किसानों, मजदूरों से भी इसी तरह एकजुट होकर आंदोलन करने का आव्हान कर रहे हैं। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प के नाम से जारी इस पत्र में केन्द्र व राज्य सरकार की नीतियों का भी जिक्र करते हुए बताया गया कि जनविरोधी नीतियों का परिणाम गरीब जनता को भुगतना पड़ता है, इसके लिए पुरजोर विरोध करना ही  उपाय है।

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पढ़िए पूरा पत्र…
छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के आव्हान-25 से 29 जुलाई के पांच दिनी कल बंद काम बंद हउ़ताल का पुरजोर समर्थन करती है। साथ ही फेडरेशन के 75 सदस्य संगठनों के सभी 5 लाख कर्मचारियों एवं धिकारियों का आव्हान करती है कि वे अपनी महंगाई भत्ता-भाड़ा भत्ता हासिल करने उक्त हड़ताल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। यह ज्ञात है कि शिक्षक, कर्मचारी संगठनों के आंदोलन साल भर से जारी हैं और यह भी विदित है कि शिक्षक एवं कर्मचारियों ने अब तक कई तरह के चरणबद्ध आंदोलन किए हैं। परंतु सरकार का रवैया भैंस के सामने बीन बजाने के बराबर है। हमारी पार्टी छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षक संगठनों से अपील करती है कि वे अपने सदस्यों को हड़ताल में शामिल करें। हालांकि छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने हड़ताल का समर्थन करने और स्कूल न जाने की घोषणा कर चुकी है जो कि सराहनीय है। हमारी एसजडसी कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन एवं टीचर्स एसोसिएशन का आव्हान करती है कि दोनों संयुक्त मंच गठित कर पांच दिनी हड़ताल को अनिश्चित कालीन हड़ताल में तब्दील कर अपनी मूलभूत समस्याओं के हल के लिए आगे बढत्रें, दरअसल यही एकमात्र रास्ता होगा। यहीं पर यह गौर करने वाली बात है कि राजनेताओं-मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों व विधायकों के वेतन भत्तों में तो लगातार वृद्धि की जाती है। इस साल के मानसून सत्र में भी इससे संबंधित तीन विधेयक पारित होंगे जिनसे नेताओं के वेतन भत्तों में 30 से 40 हजार रू. की बढ़ोत्तरी होने वाली है। जबकि महंगाई भत्ता, भाड़ा भत्ता देने से प्रत्येक कर्मचारी, अधिकारी को अधिकतम 5 हजार रूप्ए प्रति माह की वृद्धि होगी जिसे मानने सरकार तैयार नहीं हैं इससे यह अंदाजा लगाना आसान है कि सरकार शिक्षक-कर्मचारी विरोधी रवैये के साथ चल रही है। हमारी स्पेशल जोनल कमेटी मजदूर व किसान संगठनों से अपील करती है कि कर्मचारियों की हड़ताल का खुलकर समर्थन करें, जिस तरह 75 संगठन एकजुट होकर छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन बनाकर अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं उसी तर्ज पर इस फेडरेशन को छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षक, किसान, मजदूर संगठनों के साथ मिलकर एक महासंघ बनाकर केन्द्र, राज्य सरकारों की किसान-मजदूर-शिक्षक-कर्मचारी विरोधी एवं दलित-आदिवासी विरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक, संगठित व जुझारू आंदोलन का निर्माण करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

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यह विदित हो कि विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्मनाक शर्तों के तहत ही केन्द्र एवं राज्य सरकारों की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी सरकारी विभागों में लंबे समय से स्थानी नियुक्तियां बंद कर दी गई हैं। संविदा नियुक्ति, दैनिक वेतनभोगी नियुक्तियां, आउट सोर्सिंग आम बात हो गई है। इतना ही नहीं, महंगाई भत्ते में बढ़ोत्तरी न करना, वेतन-भत्तों में विभिन्न कटौतियां करना जारी है। कुल मिलाकर कहा जाए तो व्यवस्थापन खर्च कम करने के नाम पर कर्मचारियों व छोटे अधिकारियों के वेतन-भत्तों पर डाका डाला जा रहा है। जन कल्याणकारी योजनाओं, गरीब जनता को दी जाने वाली सब्सिडियों में कटौती की जा रही है। यह कमोबेश देश भर में जारी है। केन्द्र, राज्य सरकारों के बजटों में पंूजीपतियों को छूट ही छूट देते हुए उन्हें मालामाल किया जा रहा है जबकि मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों की लूट ही लूट के जरिए उन्हें बेहाल किया जा रहा है।

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देश, विदेश के कॉरपोरेट घरानों को अत्यधिक मुनाफा पहुंचाने के तहत ही केन्द्र, राज्य सरकारों खासकर केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा धड़ल्ले से एवं बेशर्मी से नित-नयी जन विरोधी नीतियां बनाई व अमल में लाई जा रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को कौड़ियों के भाव देश-विदेश के पूंजीपतियों के हाथों सौंपा जा रहा है। हाल ही की अग्निपथ योजना, वन एवं पर्यावरण संरक्षण कानूनों में पुंजीपतिपरस्त एवं जन विरेाधी संशोधित नियम-2022 बनाना आदि भाजपा सरकार के युवा विरोधी, आदिवासी विरोधी चरित्र के ताजा उदाहरण हैं ऐसी स्थिति में कर्मचारियों एवं अधिकारियों को चाहिए कि वे अपनी मांगों तक सीमित न होकर मजदूरों, किसानों, आदिवासियों की मांगों को लेकर भी साझा आंदोलन करने की ओर कदम बढ़ाएं।

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