• 14/07/2025

भांग खाकर काम करते हैं क्या? ट्रैक्टर के बाद अब ब्लूटूथ डिवाइस का बना दिया निवास प्रमाण पत्र, अफसर-कर्मचारियों के गजब कारनामे

भांग खाकर काम करते हैं क्या? ट्रैक्टर के बाद अब ब्लूटूथ डिवाइस का बना दिया निवास प्रमाण पत्र, अफसर-कर्मचारियों के गजब कारनामे
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बिहार में सरकारी सिस्टम किस तरह काम कर रहा है, इसकी बानगी एक बार फिर नजर आई। यहांं कर्मचारियों और अधिकारियों ने ट्रैक्टर के बाद अब ब्लूटूथ डिवाइस का निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया। और तो और निवास प्रमाण पत्र में फोटो के स्थान पर ब्लूटूथ डिवाइस की तस्वीर भी लगा दी। वहीं माता-पिता के नाम के कॉलम में “ईस्टवुड” लिख कर प्रमाण पत्र जारी कर दिया। 12 जुलाई को जारी यह प्रमाण पत्र अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। कर्मियों और अफसरों के इस कारनामे पर लोग जमकर मजे ले रहे हैं।

फर्जी आवेदन से खुली लापरवाही की पोल

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक युवक ने बाढ़ अंचल कार्यालय में निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। युवक का दावा है कि उसने कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन उसका प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ। इसके बाद, उसने जानबूझकर एक फर्जी आवेदन दाखिल किया, जिसमें उसने अपना नाम “ब्लूटूथ नॉइस”, माता-पिता का नाम “ईस्टवुड”, और फोटो के स्थान पर ब्लूटूथ डिवाइस की तस्वीर अपलोड की। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी सत्यापन के, अंचल कार्यालय ने इस फर्जी आवेदन पर निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया। आवेदक ने बताया कि उसने यह कदम प्रशासनिक प्रक्रिया में सत्यापन की कमी को उजागर करने के लिए उठाया था।

सोशल मीडिया पर वायरल, यूजर्स ने उड़ाया मजाक

यह प्रमाण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यूजर्स ने बिहार प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “इधर रियल अप्लाई करने पर रिजेक्ट हो जा रहा है, और ब्लूटूथ को सर्टिफिकेट मिल गया!” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “सोचने वाली बात है कि बिहार में डोमेसाइल के नाम पर किस स्तर का फर्जीवाड़ा हुआ होगा।” कुछ यूजर्स ने मजाक में कहा, “क्या ये अधिकारी भांग खाकर काम करते हैं?” एक यूजर ने लिखा, “बिहार में कुछ भी हो सकता है, सिस्टम पूरी तरह ब्लाइंड हो चुका है।”

पहले भी हुआ था ऐसा कारनामा

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में इस तरह की लापरवाही सामने आई हो। कुछ दिन पहले मुंगेर में एक ट्रैक्टर के नाम और तस्वीर के साथ निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जिसमें ट्रैक्टर को “सोनालिका चौधरी” और पता “ट्रैक्टरपुर दियारा” बताया गया था। उस घटना में भी प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठे थे, और अब ब्लूटूथ के नाम से प्रमाण पत्र जारी होने से प्रशासन की कार्यशैली फिर से कटघरे में है।

जांच के आदेश

जब इस मामले की जानकारी बाढ़ अनुमंडल अधिकारी (एसडीएम) को दी गई, तो उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए। एसडीएम ने कहा, “यह एक गंभीर लापरवाही है। हम इस मामले की गहन जांच करेंगे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रमाण पत्र रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, और डेटा एंट्री ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल

इस घटना ने बिहार में सरकारी कार्यालयों में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन पोर्टल्स जैसे RTPS बिहार (serviceonline.bihar.gov.in) के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन सत्यापन के अभाव में यह प्रणाली दुरुपयोग का शिकार हो रही है। कुछ लोगों ने इसे बिहार की नौकरशाही का “करिश्मा” करार दिया, जबकि अन्य ने इसे सरकारी कामकाज में लापरवाही का जीता-जागता सबूत बताया।

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