- 12/07/2022
मच्छरों को हेल्दी रखने देश में बनाया गया स्पेशल डाइट, चौंकिए मत ये है वजह


द तथ्य डेस्क। मच्छरों से बचने आप न जाने क्या-क्या जतन करते होंगे। अगर दिख जाए तो उन्हें भगाने और मारने के लिए बाजार में उपलब्ध तमाम तरह के छिड़कावों से लेकर उपकरणों का सहारा लेते होंगे। लेकिन हम अगर आपको यह बताएं कि हमारे देश के वैज्ञानिकों ने मच्छरों के लिए पोषक आहार तैयार किया है, वो भी इसलिए कि वे हेल्दी रहें। यह जानकर आप निश्चित ही चौंक गए होंगे। आइए आपको बताते हैं आखिर क्यों मच्छरों को तंदरुस्त रखना चाहते हैं वैज्ञानिक।
देश के सबसे बड़े वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर पुडुचेरी की एक वैज्ञानिक डा. निशा मैथ्यू और उनकी टीम ने मच्छरों के लिए एक पोषक डाइट तैयार किया है। इस कृत्रिम पोषक आहार मच्छरों को पूरी तरह से मानव रक्त की तरह ही महसूस होगा और मच्छर स्वस्थ अंडे दे सकेंगे जो वैज्ञानिकों के शोध के लिए काफी महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
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मच्छरों से होने वाली बीमारियों के रोकथाम व शोध के लिए कार्य करने वाली देश के सबसे बड़े वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर पुडुचेरी के वैज्ञानिक लगातार इस काम में जुटे रहेते हैं। सेंटर में लंबे समय से रिसर्च कर रही वैज्ञानिक डा. निशा मैथ्यू और उनकी टीम ने पाया कि स्वस्थ मच्छरों को रिसर्च हेतु पालने के लिए मानव रक्त की आवश्यकता होती है। आईसीएमआर और स्थानीय ब्लड बैंकों पर आश्रित सेंटर को कई मौकों पर खून उपलब्ध नहीं हो पाता था। इस जटिल समस्या को दूर करने के लिए तथा मच्छर पालन के लिए रक्त पर आश्रित होने के विकट समस्या को दूर करने उन्होंने मच्छरों के लिए कृत्रिम डाइट बनाने पर अपना शोध शुरू किया।
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डा. निशा और उसकी टीम ने सबसे पहले ऐसे उपकरण बनाने का फैसला किया जो मानव शरीर के तापमान के बराबर हो तथा जिसमें मौजूद लिक्विड डाइट पूरी तरह से मानव रक्त से तथा मानव रक्त के गुणों से युक्त हो। उन्होंने कई तरह के प्रयोग किए और अंत में जाकर उन्होंने एक ऐसा उपकरण तैयार किया जो पूरी तरह से मानव शरीर जैसा ही काम करता है। इसके बाद पूरी टीम ने कृत्रिम डाइट पर काम शुरू किया और अंततः अब एक ऐसा डाइट तैयार कर लिया है जो मानव रक्त के गुणों से युक्त है।
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आईसीएमआर-वीसीआरसी के निदेशक डा. अश्वनी कुमार ने भी वैज्ञानिकों के इस शोध की सराहना करते हुए कहा कि जब इन कृत्रिम आहारों का परीक्षण किया गया तो दो आहार सामान्य और दो अन्य आहार ब्लड डाइट से बेहतर साबित हुआ। इन्हें खाने से सामान्य रक्त आहार की तुलना में स्वस्थ और बड़ी संख्या में मच्छर अंडों का उत्पादन होता है।
मच्छरों से स्वस्थ अंडों के उत्पादन और इनके पालन से अब सेंटर के वैज्ञानिकों को अपने शोध के लिए स्वस्थ मच्छर लगातार मिलते रहेंगे। इससे मच्छरों से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के रोकथाम के लिए सतत रूप से जारी कई शोध बिना किसी रूकावट के जारी रह सकेंगे। ज्ञात हो कि भारत में मच्छरों से होने वाली बीमारियों में जीका, डेंगू, चिकनगुनिया, पीला बुखार सहित अन्य तरह की बीमारियां होती हैं।
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