• 21/01/2024

दाल मखनी-बटर चिकन का आविष्कारक कौन, दो रेस्टोरेंट में छिड़ी जंग, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

दाल मखनी-बटर चिकन का आविष्कारक कौन, दो रेस्टोरेंट में छिड़ी जंग, मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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व्यंजन दाल मखनी और बटर चिकन का नाम आते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। इनका आविष्कार किसने किया है?  ये सवाल शायद आपके किसी काम का नहीं लेकिन इसकी लड़ाई अब कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गई है। आपको जानकर यह हैरानी होगी कि दो प्रसिद्ध रेस्तरां ने इन भारतीय व्यंजनों पर अपना-अपना दावा किया है। इन दोनों व्यंजनों को अपना आविष्कार बताने पर रेस्तरां मोती महल ने रेस्तरां दरियागंज पर मुकदमा ठोक दिया है।

मोती महल के मालिकों ने कोर्ट के सामने दावा किया है कि उनके दिवंगत संस्थापक शेफ कुंडल लाल गुजराल थे। इऩ्होंने दाल मखनी और बटर चिकन का आविष्कार किया था। लेकिन दरियागंज रेस्तरां लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए गुमराह कर रहा है कि दरियागंज रेस्तरां और मोती महल के बीच एक संबंध है, जिसकी पहली शाखा दिल्ली के दरियागंज इलाके में खोली गई थी।

दरियांगज रेस्तरां के मालिकों का दावा है कि उनके दिवंगत संस्थापक कुंदन लाल जग्गी दोनों व्यंजनों के आविष्कारक थे, जो कि विश्व प्रसिद्ध हैं। मोती महल के मालिकों ने कोर्ट से दरियागंज रेस्तरां को ऐसा दावा करने से रोकने की मांग की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से मांग की है कि दरियागंज रेस्तरां को इसकी वेबसाइट, फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और ट्विटर सहित विभिन्न सोशल मीडिया वेबसाइटों तथा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से ‘बटर चिकन और दाल मखनी के आविष्कारक’ वाली टैगलाइन का उपयोग करने से रोका जाए।

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला ने दरियागंज रेस्तरां के मालिकों को नोटिस जारी किया है। जिसमें दरियागंज रेस्तरां मालिकों से हलफनामे के साथ एक लिखित बयान दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई की तय की है।

मोती महल ने किया दावा

मोती महल के मालिकों का दावा है कि उनके रेस्तरां के संस्थापक दिवंगत कुंडल लाल गुजराल ने पहला तंदूरी चिकन बनाया था। बाद में उन्होंने बटर चिकन और दाल मखनी बनाया। देश के विभाजन के बाद वे इसे भारत लाए। मोती महल का दावा है कि शुरुआत में बिकने के बाद चिकन का जो हिस्सा बच जाता था, उसे फ्रीज में स्टोर नहीं किया जा सकता था। इसकी चिंता गुजराल को सताने लगी। वे चिकन को फिर से हाइड्रेट करने के लिए एक सॉस लेकर आए थे। इसी से बटर चिकन का अविष्कार हुआ।

मोती महल ने अपने दावे में कहा कि दाल मखनी का आविष्कार बटर चिकन के आविष्कार के साथ जुड़ा हुआ है। गुजराल ने काली दाल के साथ भी यही नुस्खा लागू किया और लगभग उसी समय दाल मखनी का अविष्कार किया गया।

दरियांगज ने किया दावों का खंडन

मंगलवार को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। दरियागंज रेस्तरां के वकील ने मोती महल के दावों का जोरदार विरोध किया और दलील दी कि मुकदमा गलत, निराधार है और इसमें कार्रवाई का कोई कारण नहीं है। वकील ने दलीली दी कि प्रतिवादी किसी भी गलत प्रतिनिधित्व या दावे में शामिल नहीं हैं और मुकदमे में लगाए गए आरोप सच्चाई से कोसों दूर हैं। पेशावर में मोती महल रेस्तरां की एक तस्वीर के बारे में, प्रतिवादी के वकील ने कहा कि इसे दोनों पक्षों के पूर्व संस्थापकों (मोती महल के गुजराल और दरियागंज के जग्गी) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था।

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